हम कौन हैं, यह समझे बिना हम अपनी दिशा तय नहीं कर सकते – डॉ. मनमोहन वैद्य जी

Saransh Kanaujia
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नई दिल्ली। दिल्ली शब्दोत्सव 2026 के अंतिम दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी ने कहा कि संघ की कार्यशैली का मूल आधार स्वयंसेवक के माध्यम से समाज को सशक्त एवं जागरूक करना है।

तीन दिवसीय उत्सव के अंतिम दिन मंच से कई वक्ताओं ने अलग- अलग विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किये। कार्यक्रम के तीसरे दिन पुस्तक लोकार्पण, मीडिया, फिल्म और राजनीति जैसे कई मुद्दे तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गए। इसमें कई छात्रों ने चित्रकला, मूर्तिकला और संस्कृति श्लोक गायन प्रतियोगिता में भाग लिया।

प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी ने कहा संघ का पहला कदम अपने कार्यकर्ताओं को समस्याग्रस्त क्षेत्रों में उतारकर कार्य करने के लिए प्रेरित करना होता है। इसके बाद नागरिकों को सामूहिक प्रयास से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाता है। उन्होंने कहा कि “कोई भी प्रभावी समाधान समाज के सहयोग से ही संभव है, न कि समाज से अलग-थलग रहकर।”

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य डॉ. मनमोहन वैद्य जी ने भारत की भारतीय अवधारणा विषय पर चर्चा करते हुए इस बात पर जोर दिया है कि हर भारतीय को पहले यह समझना होगा कि हम कौन हैं और क्या हैं? उन्होंने अमेरिकी राजनीतिज्ञ और लेखक सैमुअल हंटिंगटन की एक पुस्तक, ‘हू आर वी’ का जिक्र करते हुए कहा, “पुस्तक में लेखक ने कहा है कि राष्ट्र समाज के नाते हम कौन हैं? जब तक इसे हम तय नहीं करते, तब तक हम हमारी प्राथमिकता और दिशा तय नहीं कर सकते।”

“रवींद्रनाथ टैगोर ने अपनी स्वदेशी समाज पुस्तक में लिखा है कि सबसे पहले हमें, हम जो हैं वह बनना पड़ेगा। हमें यह जानना होगा कि हम क्या हैं। दुनिया में ऐसा कोई देश नहीं है, जिसके दो नाम हैं। प्रत्येक देश का एक ही नाम है, लेकिन हमारे यहां अभी भी मंथन चल रहा है कि हम इंडिया हैं या भारत?”

मनमोहन वैद्य जी ने कहा कि “बगल में ब्रह्मदेश नाम का देश है, जो बाद में बर्मा बना और फिर म्यांमार हुआ, लेकिन उसे अब सिर्फ म्यांमार ही बोलते हैं। अभी भी एक ही नाम से जानते हैं। जब तक हम कौन और क्या हैं, यह तय नहीं करते, तब तक हमारी विदेश नीति, रक्षा नीति, शिक्षा नीति और अर्थ नीति हमारे विचार के प्रकाश में नहीं चल सकती।”

“आजादी के बाद भी हम लोग पश्चिम की नकल ही करते रहे हैं। 2014 के चुनाव के रिजल्ट के बाद इंग्लैंड के ‘द गार्डियन’ पेपर ने अपने संपादकीय में लिखा कि 18 मई 2014 को भारत के इतिहास में विशेष रूप से लिखा जाएगा कि आज भारत से अंग्रेज चले गए।’

ऐसे में अगर हमें भारत की दिशा तय करनी है और दुनिया में हमारा रोल क्या है, उसे निभाना है, तो हमें पहले समझना होगा कि हम क्या हैं।”

साभार : विश्व संवाद केंद्र

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