संगठित और संयमित समाज ही राष्ट्र को परम वैभव की ओर ले जा सकता है – प्रदीप जोशी जी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस संघ शताब्दी वर्ष

– हिन्दू समाज का जागरण एवं संगठन ही संघ का उद्देश्य

जौनपुर. तिलकधारी महाविद्यालय के प्रांगण में आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी जी ने कहा कि भारत की संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम एवं सर्व धर्म समभाव की है। यह व्यक्तिमंगल से विश्वमंगल की संस्कृति है। आज वर्तमान समय में हिन्दू समाज के जागरण एवं संगठन की आवश्यकता है। हिन्दू समाज के जागरण के इस कार्य को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 1925 में प्रारंभ किया। इस वर्ष 2025 में संघ के स्थापना के सौ वर्ष पूरे हुए हैं और इसी क्रम में संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त देशभर में हिन्दू सम्मेलनों का आयोजन हो रहा है। उन्होंने कहा कि जब हिन्दू समाज संगठित और अनुशासित होगा, तभी भारत विश्व गुरु बनेगा। एक संगठित और संयमित समाज ही राष्ट्र को परम वैभव की ओर ले जा सकता है।

उन्होंने कहा कि संघ शताब्दी वर्ष में समाज परिवर्तन के लिए पांच आयाम पर कार्य कर रहा है। ये पांच बातें सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुम्ब प्रबोधन, स्वदेशी भाव का जागरण और नागरिक कर्तव्यों का बोध को लेकर समाज का जागरण कर रहा है। इनसे हिन्दू समाज की जय होगी और विश्व का कल्याण होगा, जिसमें सभी को अपनी भूमिका निभानी चाहिए। मुख्य वक्ता ने सकारात्मक विमर्श को खड़ा करने की आवश्यकता का बल दिया। युवा को पश्चिम के झूठे एवं छद्म विचारों को तोड़ने की आवश्यकता है।

मुख्य अतिथि गायत्री परिवार के आचार्य राम सिंह जी ने कहा कि सनातन धर्म ने ही संपूर्ण विश्व को जोड़ने का मंत्र दिया है। इसकी कल्पना केवल सनातन संस्कृति में ही मिलती है।

विशिष्ट अतिथि प्रो शिखा श्रीवास्तव जी ने कहा कि आधुनिक दौर में परिवार एवं कुटुम्ब परम्परा को बचाने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सौ वर्षों की साधना और संतों की प्रेरणा से आज देश का हिन्दू संगठित हुआ है। अब लोग ‘भारतमाता की जय’ और ‘वंदेमातरम्’ बोलने के लिए तत्पर हैं। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि फूलचंद सोनकर जी ने कहा, जब हिन्दू समाज में जाति-पाति, ऊंच-नीच का भेदभाव मिटकर एकता और समरसता आएगी, तभी एक मजबूत और विकसित, समर्थ भारत का निर्माण संभव है।

अतिथियों का स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. उत्तम गुप्ता जी ने किया। संचालन डॉ. उदय जी ने किया।

साभार : विश्व संवाद केंद्र

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