गणतंत्र दिवस 2026: कर्तव्य पथ पर ‘वंदे मातरम’ की गूँज और आत्मनिर्भर भारत की शक्ति

Saransh Kanaujia
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नई दिल्ली. भारत के 77वें गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2026) के उत्सव की तैयारियाँ दिल्ली के कर्तव्य पथ पर पूरे जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं। इस वर्ष का समारोह न केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन होगा, बल्कि भारत की सांस्कृतिक जड़ों और भविष्य के “आत्मनिर्भर” संकल्पों का अनूठा संगम बनेगा।

1. मुख्य अतिथि: यूरोपीय संघ के साथ ऐतिहासिक कूटनीति

इस बार भारत ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए यूरोपीय संघ (EU) के दो शीर्ष नेताओं को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है:

  • उर्सुला वॉन डेर लेयेन: यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष।

  • एंटोनियो कोस्टा: यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष।

    यह आमंत्रण भारत और यूरोप के बीच गहरे होते रणनीतिक और व्यापारिक संबंधों का प्रतीक है। वे 25 से 27 जनवरी तक भारत की राजकीय यात्रा पर रहेंगे।

2. मुख्य थीम: ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष

वर्ष 2026 हमारे राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ का प्रतीक है। रक्षा सचिव के अनुसार, पूरी परेड इसी गौरवशाली विरासत के इर्द-गिर्द केंद्रित होगी:

  • विशेष दृश्य: कर्तव्य पथ पर 1923 की दुर्लभ पेंटिंग्स (तेजेंद्र कुमार मित्रा द्वारा निर्मित) प्रदर्शित की जाएंगी, जो वंदे मातरम के श्लोकों को दर्शाती हैं।

  • सांस्कृतिक महाकुंभ: लगभग 2,500 कलाकार “स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम” और “समृद्धि का मंत्र – आत्मनिर्भर भारत” की थीम पर प्रस्तुतियां देंगे।

3. आत्मनिर्भर भारत की झलक: झांकियां और सैन्य शक्ति

इस साल कर्तव्य पथ पर कुल 30 झांकियां (17 राज्य/UT और 13 मंत्रालय) दिखाई देंगी:

  • आत्मनिर्भर झांकी: महाराष्ट्र की झांकी में ‘गणेशोत्सव’ को आत्मनिर्भरता के प्रतीक के रूप में दिखाया जाएगा, जबकि असम की झांकी ‘आशिरकांडी हस्तकला’ को प्रदर्शित करेगी।

  • पहली बार ‘बैटल Array’: भारतीय सेना पहली बार एक विशेष “Phased Battle Array” प्रारूप दिखाएगी। इसमें अर्जुन टैंक, टी-90, ब्रह्मोस मिसाइल, और स्वदेशी ‘धनुष’ तोप प्रणाली के साथ रोबोटिक म्युल (Robotic Mules) और ड्रोन का प्रदर्शन होगा।

  • पशु सैन्य दस्ता: ज़ांस्करी पोनी, बैक्ट्रियन ऊंट और आर्मी डॉग स्क्वाड अपनी परिचालन क्षमताओं का प्रदर्शन करेंगे।

4. वीआईपी संस्कृति का अंत: नदियों के नाम पर दीर्घाएं

सरकार ने इस बार परेड देखने आने वाले लोगों के लिए बैठने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। दीर्घाओं (Enclosures) के नाम अब भारत की प्रमुख नदियों (जैसे गंगा, ब्रह्मपुत्र, चंबल, सिंधु) के नाम पर रखे गए हैं।

गणतंत्र दिवस 2026 केवल एक सैन्य परेड नहीं, बल्कि एक विकसित भारत की ओर बढ़ते कदमों का उत्सव है। “वंदे मातरम” की भावना और “आत्मनिर्भरता” का संकल्प इस वर्ष के समारोह को इतिहास के पन्नों में यादगार बना देगा।

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