लखनऊ । बुधवार, 26 अगस्त 2026
अयोध्या के श्री राम मंदिर निर्माण चंदे में कथित वित्तीय अनियमितताओं उजागर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) से राहत मिली है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी (FIR) के मामले में सुनवाई करते हुए अभिषेक उपाध्याय को दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है।
क्या है पूरा मामला?
पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने हाल ही में राम मंदिर चंदे से जुड़ी कथित गड़बड़ी और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर खोजी रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इसके उपरांत, 18 अगस्त 2026 को गाजियाबाद के इंदिरापुरम पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ कथित रोड-रेज (सड़क विवाद) की घटना को लेकर एफआईआर दर्ज की गई।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय ने अदालत में तर्क दिया कि यह मामला पत्रकार की स्वतंत्र खोजी पत्रकारिता को दबाने और उन्हें डराने के इरादे से दर्ज कराया गया एक फर्जी मामला है। याचिका में आरोप लगाया गया कि जिस समय यह कथित घटना हुई, पत्रकार अपनी नाबालिग बेटी के साथ थे और वहां कोई हाथापाई या दुर्घटना नहीं हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश:
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अंतरिम सुरक्षा: शीर्ष अदालत ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ मौजूदा एफआईआर या भविष्य में दर्ज की जाने वाली किसी अन्य एफआईआर में अगली सुनवाई तक कोई भी दंडात्मक या दंडात्मक कार्रवाई (जैसे गिरफ्तारी) नहीं की जाएगी।
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FIR की प्रति उपलब्ध कराना: कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को तुरंत निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता को इंदिरापुरम थाने में दर्ज एफआईआर की आधिकारिक प्रति उपलब्ध कराए।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने की स्वतंत्रता: पीठ ने कहा कि एफआईआर की प्रति मिलने के बाद याचिकाकर्ता इसे रद्द कराने (Quashing) या अग्रिम जमानत जैसी राहत पाने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं।
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अनुपालन रिपोर्ट और अगली सुनवाई: गाजियाबाद के पुलिस आयुक्त को एफआईआर कॉपी सौंपने संबंधी अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को क्या राहत दी है?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक पत्रकार के खिलाफ दर्ज एफआईआर या भविष्य में दर्ज होने वाली किसी अन्य एफआईआर में कोई कठोर या दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
Q2. याचिकाकर्ता के खिलाफ क्या आरोप लगाए गए थे?
उत्तर: याचिकाकर्ता के खिलाफ गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में 18 अगस्त को सड़क विवाद (रोड-रेज) से संबंधित एफआईआर दर्ज कराई गई थी, जिसे याचिकाकर्ता ने पूरी तरह से फर्जी और पूर्वाग्रह से ग्रस्त बताया है।
Q3. मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार का पक्ष सुनने के लिए 7 सितंबर 2026 को अगली सुनवाई करेगा।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह लेख मीडिया रिपोर्ट्स और सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर आधारित एक समाचार विश्लेषण है। इसका उद्देश्य केवल सूचनात्मक और जनहित में तथ्य प्रस्तुत करना है। किसी भी कानूनी कार्यवाही के लिए आधिकारिक अदालती आदेशों का अवलोकन करें।