पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक बदलाव: सोमवार को विधानसभा में UCC विधेयक पेश करेगी शुभेंदु अधिकारी सरकार

Saransh Kanaujia
4 Min Read

कोलकाता शुक्रवार, 26 जून 2026

पश्चिम बंगाल के राजनैतिक और सामाजिक इतिहास में एक बहुत बड़ा कानूनी मोड़ आने वाला है। सूबे की सत्ता पर काबिज हुई मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार अपने सबसे बड़े चुनावी वादे को समय से पहले पूरा करने की तैयारी में है। राज्य मंत्रिमंडल और संसदीय कार्य मंत्री शंकर घोष से मिले संकेतों के मुताबिक, आगामी सोमवार (29 जून, 2026) को पश्चिम बंगाल विधानसभा के पटल पर समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश किया जा सकता है।

तय समय-सीमा से काफी पहले उठाया जा रहा है कदम

साल 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने अपने संकल्प पत्र (घोषणापत्र) में राज्य की जनता से वादा किया था कि सत्ता में आने के छह महीने के भीतर समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। इस संकल्प पत्र को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अप्रैल में जारी किया था। हालांकि, चुनाव नतीजों के बाद सरकार गठन के दो महीने के भीतर ही इस बिल को विधानसभा में लाया जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि नई सरकार इस बड़े सुधार को लेकर कितनी गंभीर है।

बिजनेस एडवायजरी कमेटी की बैठक में लगी मुहर

कैबिनेट सूत्रों के अनुसार, गुरुवार (25 जून, 2026) की शाम को पश्चिम बंगाल विधानसभा में कार्यमंत्रणा समिति (Business Advisory Committee) की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में आगामी हफ्ते के विधायी कार्यों पर चर्चा हुई और यूसीसी विधेयक (UCC Bill) को सोमवार को पेश करने के प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया गया।

मुख्य मंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार (26 जून) को कोलकाता के कॉलेज स्ट्रीट में महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की 189वीं जयंती के मौके पर मीडिया से बात करते हुए इस बात की पुष्टि की। उन्होंने कहा:

“पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता जरूर लागू होगी। इसके लिए पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है। एक विशेष समिति का गठन भी किया गया है और इसकी पूरी रूपरेखा सोमवार को विधानसभा के पटल पर साझा की जाएगी।”

गुजरात और असम मॉडल की तर्ज पर होगा लागू

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने साफ किया है कि पश्चिम बंगाल में यूसीसी को गुजरात, उत्तराखंड और असम के मॉडल की तर्ज पर कानूनी प्रक्रियाओं के तहत लागू किया जाएगा। पश्चिम बंगाल देश का ऐसा चौथा बड़ा राज्य बनने जा रहा है जहां भाजपा सरकार इसे लागू कर रही है।

इस विधेयक के तहत विवाह, तलाक, संपत्ति के अधिकार, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationships) जैसे पारिवारिक और नागरिक मामलों के लिए सभी धर्मों के नागरिकों हेतु एक समान कानून स्थापित करने का प्रस्ताव है। सूत्रों के मुताबिक, इसमें बहुविवाह (Polygamy) पर पूरी तरह प्रतिबंध और लिव-इन रिलेशनशिप का जिला अधिकारियों के पास अनिवार्य पंजीकरण जैसे कड़े प्रावधान शामिल हो सकते हैं।

पश्चिम बंगाल में यूसीसी का राजनैतिक गणित

294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में भाजपा के पास पूर्ण बहुमत है, जिससे इस बिल के पारित होने में कोई तकनीकी अड़चन आने की उम्मीद नहीं है। हालांकि, करीब 30% मुस्लिम आबादी वाले इस राज्य में विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस (TMC) और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के सदस्यों ने इस कदम का विरोध शुरू कर दिया है। विपक्ष का तर्क है कि पर्सनल लॉ धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े हैं और इसे जबरन लागू नहीं किया जाना चाहिए।

इसके अलावा, सोमवार को कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार दो और महत्वपूर्ण विधेयक—’पश्चिम बंगाल सार्वजनिक व्यवस्था रखरखाव (संशोधन) विधेयक’ और ‘पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधि नियंत्रण विधेयक 2026’ भी पेश कर सकती है।

Related Post

Share This Article