पश्चिम बंगाल में अवैध मदरसों पर बड़ा एक्शन: 12 जिलों में जांच के लिए बनी 18 सदस्यीय हाई-पावर कमेटी

Saransh Kanaujia
5 Min Read

कोलकाता । रविवार, 12 जुलाई 2026

पश्चिम बंगाल के अल्पसंख्यक मामलों एवं मदरसा शिक्षा विभाग ने राज्य में अवैध और गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। सरकार ने राज्य के 12 संवेदनशील जिलों में संचालित हो रहे ऐसे मदरसों (जिन्हें आमतौर पर ‘खारिजी मदरसा’ कहा जाता है) की पहचान और चल रहे सर्वेक्षण की समीक्षा के लिए एक 18 सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया है।

यह प्रशासनिक कदम राज्य में सत्ता परिवर्तन और नई सरकार के कार्यभार संभालने के बाद शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के प्रयासों का हिस्सा है।

समीक्षा समिति की समयसीमा और कार्ययोजना

विभाग द्वारा गठित यह हाई-पावर कमेटी धरातल पर उतरकर गहन जांच करने जा रही है। इसकी पूरी समयसीमा और प्रक्रिया तय कर दी गई है:

  • दौरे की शुरुआत: यह समिति 15 जुलाई से चिन्हित किए गए सभी 12 जिलों का दौरा शुरू करेगी।

  • रिपोर्ट सौंपने की तारीख: समिति जमीनी हकीकत का जायजा लेने के बाद 21 जुलाई तक अपनी विस्तृत और अंतिम रिपोर्ट अल्पसंख्यक मामलों एवं मदरसा शिक्षा विभाग को सौंपेगी।

  • प्रशासनिक कार्रवाई: इस विस्तृत रिपोर्ट में दी गई सिफारिशों के आधार पर ही विभाग इन अवैध संस्थानों के खिलाफ आगे की कड़ी प्रशासनिक व कानूनी कार्रवाई करेगा।

इन 12 जिलों पर टिकी हैं सरकार की नजरें

जिला अधिकारियों (DM) से प्राप्त प्रारंभिक रिपोर्टों के विश्लेषण के बाद राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ ने उन 12 जिलों की सूची तैयार की है, जहां सबसे ज्यादा गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित होने की आशंका है। इन जिलों में दोबारा सघन समीक्षा की जाएगी:

  1. कूचबिहार

  2. उत्तर दिनाजपुर

  3. मालदा

  4. मुर्शिदाबाद

  5. बीरभूम

  6. पश्चिम मेदिनीपुर

  7. पूर्व मेदिनीपुर

  8. नदिया

  9. हुगली

  10. हावड़ा

  11. उत्तर 24 परगना

  12. दक्षिण 24 परगना

मदरसों से जुटाई जा रही हैं ये 6 मुख्य जानकारियां

इससे पहले जून के शुरुआती सप्ताह में सरकार ने सभी जिला अधिकारियों को 5 जुलाई तक अपने क्षेत्रों से डेटा भेजने का निर्देश दिया था। इस डेटाबेस को तैयार करने के लिए हर मदरसे से निम्नलिखित विवरण मांगे गए हैं:

  • स्थापना और पंजीकरण: मदरसा कब स्थापित हुआ और अल्पसंख्यक मामलों के विभाग में उसका पंजीकरण (Registration) विवरण क्या है।

  • छात्र एवं स्टाफ की संख्या: मदरसे में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की कुल संख्या और वहां कार्यरत शिक्षकों व गैर-शिक्षण कर्मचारियों का पूरा ब्यौरा।

  • आवासीय स्थिति और पाठ्यक्रम: क्या मदरसा आवासीय (Residential) है या गैर-आवासीय, और वहां विद्यार्थियों को क्या पाठ्यक्रम (Syllabus) पढ़ाया जा रहा है।

कड़ी कार्रवाई की चेतावनी: अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा मंत्री खुदीराम टुडू ने स्पष्ट किया है कि पहचान की प्रक्रिया पूरी होते ही सभी अवैध रूप से संचालित मदरसों को तुरंत बंद कर दिया जाएगा। साथ ही, मदरसों की आड़ में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों को दंडित भी किया जाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: ‘खारिजी मदरसा’ किसे कहा जाता है?

उत्तर: पश्चिम बंगाल में ऐसे मदरसे जो राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड या अल्पसंख्यक मामलों के विभाग से मान्यता प्राप्त नहीं होते और स्वतंत्र रूप से चलते हैं, उन्हें आमतौर पर ‘खारिजी मदरसा’ या गैर-मान्यता प्राप्त मदरसा कहा जाता है।

प्रश्न 2: इस समीक्षा समिति का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इस 18 सदस्यीय समिति का मुख्य उद्देश्य जिला अधिकारियों द्वारा दी गई प्रारंभिक रिपोर्टों की दोबारा गहन समीक्षा करना और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी अवैध मदरसा बिना पंजीकरण के संचालित न हो सके।

प्रश्न 3: जांच रिपोर्ट कब तक सौंपी जानी है?

उत्तर: समिति 15 जुलाई से जिलों का दौरा करेगी और 21 जुलाई तक अपनी अंतिम रिपोर्ट विभाग को सौंप देगी, जिसके बाद अवैध संस्थानों को बंद करने की कार्रवाई शुरू होगी।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल शैक्षणिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इस लेख में दी गई जानकारी राज्य सरकार के आधिकारिक बयानों और प्रशासनिक निर्देशों पर आधारित है।

Related Post

Share This Article