बिहार की राजनीति में हड़कंप: पटना हाईकोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष समेत 42 विधायकों को भेजा नोटिस

Saransh Kanaujia
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पटना. बिहार विधानसभा में उस वक्त हड़कंप मच गया जब पटना हाईकोर्ट ने सत्ता और विपक्ष के कुल 42 विधायकों को एक साथ कानूनी नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। इन विधायकों में विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार और ऊर्जा मंत्री विजेंद्र यादव जैसे दिग्गज नेताओं के नाम शामिल हैं। मामला चुनावी हलफनामों में कथित हेराफेरी और अनियमितताओं से जुड़ा है।

मामला क्या है?

अदालत ने यह कार्रवाई उन पराजित उम्मीदवारों की याचिकाओं पर की है, जिन्होंने 2020 के विधानसभा चुनावों में विजयी उम्मीदवारों पर गंभीर आरोप लगाए थे। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि:

  • विधायकों ने नामांकन के समय अपने हलफनामे में संपत्ति और आपराधिक रिकॉर्ड की सही जानकारी नहीं दी।

  • कई सीटों पर मतदान और मतगणना की प्रक्रिया में धांधली की गई।

  • महत्वपूर्ण तथ्यों को जानबूझकर छिपाया गया ताकि चुनाव परिणामों को प्रभावित किया जा सके।

नोटिस की जद में आए प्रमुख चेहरे

अदालत के कड़े रुख ने किसी भी दल को नहीं बख्शा है। नोटिस पाने वालों में प्रमुख नाम शामिल हैं:

  1. प्रेम कुमार: बिहार विधानसभा अध्यक्ष (NDA)।

  2. विजेंद्र यादव: ऊर्जा मंत्री (JDU)।

  3. जीवेश मिश्रा: पूर्व मंत्री (BJP)।

  4. चेतन आनंद: विधायक (हाल ही में दल बदलने को लेकर चर्चा में रहे)।

  5. अमरेंद्र प्रसाद: आरजेडी (RJD) विधायक, गोह।

क्या जा सकती है विधायकी?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (RP Act) के तहत आता है। यदि कोर्ट की सुनवाई में यह साबित हो जाता है कि विधायक ने जानबूझकर गलत जानकारी दी है, तो:

  • उनका निर्वाचन रद्द (Null and Void) घोषित किया जा सकता है।

  • भविष्य में चुनाव लड़ने पर पाबंदी लग सकती है।

  • संबंधित विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की स्थिति बन सकती है।

सियासी गलियारों में सुगबुगाहट

इस नोटिस के बाद बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। जहां विपक्षी दल इसे निष्पक्ष चुनाव की जीत बता रहे हैं, वहीं सत्ता पक्ष इसे एक सामान्य कानूनी प्रक्रिया मान रहा है। विधायकों को अब निर्धारित समय के भीतर हाईकोर्ट में अपना लिखित स्पष्टीकरण दाखिल करना होगा।

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