पूर्वी चंपारण में ‘लव ट्रैप’ और मानव तस्करी का सनसनीखेज भंडाफोड़: 36 घंटे में 4 नाबालिग लड़कियां मुक्त, मौलवी गिरफ्तार

मोतिहारी । शनिवार, 6 जून 2026

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां प्यार, शादी और विदेश यात्रा के सुनहरे सपने दिखाकर नाबालिग लड़कियों को मानव तस्करी के दलदल में धकेलने की साजिश रची जा रही थी। हालांकि, पूर्वी चंपारण पुलिस की मुस्तैदी और त्वरित कार्रवाई के कारण एक बहुत बड़ी अनहोनी टल गई। पुलिस ने महज 36 घंटे के भीतर जाल बिछाकर चार नाबालिग लड़कियों को सकुशल बरामद कर लिया है और इस काले धंधे के मुख्य मास्टरमाइंड को दबोच लिया है।

मदरसे से शुरू हुआ ‘प्रेमजाल’ का खतरनाक खेल

यह पूरी घटना सिकरहना अनुमंडल के शिकरगंज थाना क्षेत्र की है। पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी भी अभिभावक के होश उड़ाने के लिए काफी हैं। गिरफ्तार आरोपी की पहचान असफाक के रूप में हुई है, जो पहले एक स्थानीय मदरसे में जुड़ा हुआ था।

आरोपी ने सबसे पहले मदरसे में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा को अपना निशाना बनाया। उसने धीरे-धीरे उस छात्रा का विश्वास जीता और फिर मोबाइल फोन के जरिए लगातार बातचीत कर उसे पूरी तरह अपने वश (प्रभाव) में ले लिया। जब छात्रा उसके झांसे में आ गई, तो असफाक ने उसके जरिए उसकी अन्य सहेलियों तक भी अपनी पहुंच बना ली। आरोपी इन सभी मासूम लड़कियों को बेहतर जिंदगी, शादी और विदेश घुमाने के बड़े-बड़े सपने दिखाकर बहला-फुसला रहा था।

लड़कियों को बेचने की थी साजिश: पीड़ित छात्रा का बड़ा खुलासा

इस मामले में सबसे सनसनीखेज मोड़ तब आया जब पुलिस ने लड़कियों को बरामद किया। बरामदगी के बाद एक छात्रा ने पुलिस के सामने जो बयान दिया, उसने इस मामले को सीधे तौर पर ‘ह्यूमन ट्रैफिकिंग’ (मानव तस्करी) से जोड़ दिया।

छात्रा ने बताया कि उसने आरोपी असफाक को मोबाइल फोन पर किसी अज्ञात व्यक्ति से बात करते हुए सुना था। असफाक फोन पर कह रहा था कि “इन लड़कियों को कहीं ले जाकर बेच दिया जाएगा।” इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद पुलिस प्रशासन के कान खड़े हो गए और जांच का दायरा केवल गुमशुदगी से बढ़कर एक बड़े अंतरराष्ट्रीय या अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह की ओर मुड़ गया।

अभिभावकों की शिकायत और मदरसा प्रबंधन की भूमिका

शुरुआती जानकारी के अनुसार, आरोपी की संदिग्ध गतिविधियों को लेकर लड़कियों के परिजनों को पहले ही कुछ शक हुआ था। उन्होंने इसकी शिकायत मदरसा प्रबंधन से भी की थी, जिसके बाद आरोपी को मदरसे से हटा दिया गया था।

महत्वपूर्ण सुझाव: यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि यदि मदरसा प्रबंधन ने आरोपी को हटाते समय ही इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दे दी होती, तो शायद यह आरोपी लड़कियों को लेकर फरार होने में कामयाब न हो पाता। कानूनन और सामाजिक तौर पर ऐसी संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट तुरंत पुलिस को दी जानी चाहिए ताकि समय रहते अपराधियों पर नकेल कसी जा सके। इसके बावजूद, आरोपी मोबाइल के जरिए लड़कियों के संपर्क में रहा और उन्हें भगा ले गया।

एसपी के निर्देश पर 36 घंटे का मेगा ऑपरेशन

चार लड़कियों के एक साथ लापता होने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्वी चंपारण के एसपी स्वर्ण प्रभात ने तुरंत कड़ा रुख अपनाया। उनके निर्देश पर सिकरहना एसडीपीओ अभिषेक कुमार के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया।

पुलिस ने आधुनिक वैज्ञानिक और तकनीकी अनुसंधान का सहारा लिया। मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग और कॉल डिटेल्स (CDR) के जरिए आरोपी को घेरा गया। लगातार कई जगहों पर छापेमारी करने के बाद आखिरकार पुलिस ने ढाका थाना क्षेत्र से आरोपी असफाक को धर दबोचा। आरोपी की निशानदेही पर चारों नाबालिग लड़कियों को भी सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया।

क्या किसी बड़े सिंडिकेट का हाथ है? जांच जारी

पुलिस ने आरोपी के पास से इस्तेमाल किया जा रहा मोबाइल फोन जब्त कर लिया है। एसपी स्वर्ण प्रभात के अनुसार, आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेजा जा रहा है। हालांकि, पुलिस का काम यहीं खत्म नहीं हुआ है। अब पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि असफाक के पीछे कौन सा संगठित मानव तस्करी गिरोह (Organized Trafficking Gang) काम कर रहा था। उसके मोबाइल का पूरा डेटा और कॉल रिकॉर्ड्स खंगाले जा रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि वह लड़कियों को किसे और कहां बेचने वाला था।

समय रहते पुलिस की इस बड़ी सफलता ने चार मासूमों की जिंदगी बर्बाद होने से बचा ली, लेकिन यह घटना समाज और अभिभावकों के लिए एक बड़ा सबक है कि वे अपने बच्चों की मोबाइल गतिविधियों और उनके संपर्क में आने वाले लोगों पर पैनी नजर रखें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *