सीएम योगी ने अयोध्या में महंत परमहंस रामचंद्र दास महाराज को अर्पित की श्रद्धांजलि, रामलला और हनुमानगढ़ी के किए दर्शन

Saransh Kanaujia
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अयोध्या | शनिवार, 15 अगस्त 2026
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या पहुंचकर श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख स्तंभ रहे ब्रह्मलीन महंत परमहंस रामचंद्र दास महाराज की 23वीं पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने सरयू अतिथि गृह के समीप रामकथा पार्क स्थित उनकी समाधि स्थल पर पुष्पार्चन कर उनके ऐतिहासिक योगदान को नमन किया।

राम जन्मभूमि आंदोलन और महंत परमहंस जी का संकल्प

महंत परमहंस रामचंद्र दास महाराज श्रीराम जन्मभूमि न्यास के प्रथम अध्यक्ष थे। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े धार्मिक, सामाजिक और कानूनी संघर्षों में अग्रणी भूमिका निभाई।
  • गोरक्षपीठ से आत्मीय संबंध: गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी के साथ मिलकर उन्होंने राम मंदिर आंदोलन को नया आयाम दिया था।
  • मंदिर निर्माण का संकल्प: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्मरण कराया कि अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण महंत जी का प्रमुख संकल्प था, जो अब साकार हो चुका है।

हनुमानगढ़ी और रामलला के किए दर्शन-पूजन

समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या धाम के प्रमुख मंदिरों में दर्शन किए:
  1. हनुमानगढ़ी: संकटमोचन बजरंगबली के दर्शन कर राज्य की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।
  2. श्रीराम जन्मभूमि मंदिर: रामलला के मुख्य दरबार में पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना और आरती की।

दिगंबर अखाड़ा में संत समाज से मुलाकात

मुख्यमंत्री दिगंबर अखाड़ा पहुंचे, जहां आयोजित 23वें पुण्य स्मृति महामहोत्सव कार्यक्रम में उन्होंने भाग लिया। इस दौरान संत समाज की भारी उपस्थिति रही, जहां सभी ने महंत परमहंस जी की तपस्या और आध्यात्मिक परंपरा में उनके योगदान को याद किया।

Frequently Asked Questions (FAQ)

Q1: सीएम योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में किसकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की?
उत्तर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख संत और श्रीराम जन्मभूमि न्यास के प्रथम अध्यक्ष ब्रह्मलीन महंत परमहंस रामचंद्र दास महाराज की 23वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
Q2: परमहंस रामचंद्र दास महाराज का मुख्य योगदान क्या था?
उत्तर: वे श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के शीर्ष अगुआ संतों में से एक थे और श्रीराम जन्मभूमि न्यास के पहले अध्यक्ष रहे।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्ट्स और आधिकारिक जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

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