गाजियाबाद: 22 साल बाद बुजुर्ग दंपति को मिला अपनी दुकान का मालिकाना हक, अवैध कब्जे पर चला प्रशासन का डंडा

गाजियाबाद । बुधवार, 17 जून 2026

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से न्याय और प्रशासनिक तत्परता की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने न केवल एक बुजुर्ग दंपति के चेहरों पर खोई हुई मुस्कान वापस ला दी, बल्कि कानून व्यवस्था पर आम जनता के भरोसे को और मजबूत किया है। गाजियाबाद के गांधीनगर इलाके में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपति को उनकी दुकान करीब 22 साल के लंबे इंतजार और प्रताड़ना के बाद आखिरकार वापस मिल गई है।

अवैध कब्जे की इस समस्या पर जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए न सिर्फ दुकान को खाली कराया, बल्कि खुद जिलाधिकारी (DM) ने मौके पर पहुंचकर बुजुर्ग दंपति को दुकान की चाबी सौंपी।

क्या है पूरा मामला?

शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात को लेकर थोड़ा भ्रम था कि दुकान पर कब्जा कितने समय से था और पीड़ित कौन हैं। नवीनतम और सही जानकारी के अनुसार:

  • पीड़ित दंपति: यह दुकान गांधीनगर निवासी बुजुर्ग दंपति प्रमोद बत्रा और सुमन बत्रा की है।

  • विवाद की पृष्ठभूमि: प्रमोद बत्रा ने यह दुकान वर्ष 1992 में नगर पालिका से लीज पर ली थी और वहां वे कई सालों तक जूस की दुकान चलाते थे।

  • कैसे हुआ कब्जा: कुछ समय बाद प्रमोद बत्रा की तबीयत खराब हो गई, जिसके कारण उन्होंने दुकान के संचालन की जिम्मेदारी मोहम्मद इमामुद्दीन मलिक को सौंप दी थी। लेकिन कुछ समय बाद इमामुद्दीन ने दुकान खाली करने से साफ इनकार कर दिया और उस पर अवैध रूप से पूरी तरह कब्जा जमा लिया।

  • समय अवधि: यह अवैध कब्जा पिछले 22 वर्षों से चला आ रहा था (न कि 25 या 30 वर्ष, जैसा कि शुरुआती कुछ अपुष्ट दावों में कहा गया)।

धमकियों के साए में गुजरे साल, टूट चुकी थी उम्मीद

प्रमोद बत्रा और सुमन बत्रा ने बताया कि पिछले 22 सालों में उन्होंने कई बार अपनी दुकान वापस मांगी, लेकिन आरोपी इमामुद्दीन मलिक उन्हें लगातार गंभीर परिणाम भुगतने और जान से मारने की धमकियां देता था। वह गाली-गलौज पर उतर आता था, जिसके डर से बुजुर्ग दंपति लाचार महसूस कर रहे थे। सालों तक चक्कर काटने के बाद वे न्याय की उम्मीद पूरी तरह खो चुके थे।

सोमवार को शिकायत, मंगलवार को ही एक्शन!

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला और सकारात्मक मोड़ तब आया जब बुजुर्ग दंपति सोमवार (15 जून 2026) को गाजियाबाद के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ से मिले और रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने तत्काल जांच के आदेश दिए। प्रशासनिक स्क्रीनिंग कमेटी ने दंपति के लीज और मालिकाना हक से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेजों का गहनता से परीक्षण किया। कागजात सही पाए जाने पर तुरंत एक्शन का प्लान तैयार किया गया।

मंगलवार (16 जून 2026) को खुद जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम के साथ गांधीनगर स्थित दुकान पर पहुंचे। प्रशासन की कड़ी मौजूदगी के सामने अवैध कब्जाधारी की एक न चली और दुकान को तुरंत खाली करा लिया गया।

‘हमारे लिए हनुमान बनकर आए डीएम साहब’

दुकान को कब्जामुक्त कराने के बाद जिला प्रशासन ने एक उत्सव जैसा माहौल बना दिया। खुद बुजुर्ग दंपति के हाथों से नारियल फोड़कर दुकान का दोबारा उद्घाटन (गृह प्रवेश) कराया गया।

अपनी दुकान की चाबी वापस पाकर सुमन बत्रा और प्रमोद बत्रा बेहद भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिला प्रशासन का आभार जताते हुए बुजुर्ग दंपति ने कहा:

“हमें विश्वास नहीं था कि इस जीवन में यह दुकान कभी वापस मिलेगी। हमारे लिए तो जिलाधिकारी साहब साक्षात हनुमान जी बनकर आए और हमारी सालों पुरानी पीड़ा हर ली।”

भू-माफियाओं के खिलाफ प्रशासन का ‘गृह प्रवेश’ अभियान

इस बड़ी कार्रवाई के बाद गाजियाबाद के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने कहा कि जिले में अवैध कब्जाधारकों और भू-माफियाओं के खिलाफ ‘गृह प्रवेश अभियान’ चलाया जा रहा है। इसके तहत गरीबों, असहायों और बुजुर्गों की संपत्तियों पर कुंडली मारकर बैठे दबंगों को खदेड़ा जा रहा है और असली मालिकों को उनका हक वापस दिलाया जा रहा है। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी की भी जमीन या दुकान पर किसी ने गलत तरीके से कब्जा किया है, तो वे बिना डरे सीधे प्रशासन से संपर्क करें, निष्पक्ष जांच के बाद सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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