2013 मुजफ्फरनगर दंगा मामला: MP/MLA कोर्ट ने दी भाजपा और सपा नेताओं पर दर्ज मुकदमे की वापसी को मंजूरी

Saransh Kanaujia
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मुजफ्फरनगर । शुक्रवार, 14 अगस्त 2026
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की विशेष MP/MLA अदालत (अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देवेंद्र कुमार फौजदार) ने वर्ष 2013 के दंगे से जुड़े एक बेहद चर्चित मामले में राज्य सरकार को अभियोजन वापस लेने की इजाजत दे दी है। इस मुकदमे में केंद्रीय पूर्व मंत्रियों, राज्य सरकार के मंत्रियों, पूर्व विधायकों तथा समाजवादी पार्टी के मौजूदा सांसद सहित कई प्रमुख राजनेताओं को आरोपी बनाया गया था।

क्या है पूरा मामला?

यह मुकदमा 31 अगस्त 2013 को सिकड़ेड़ा थाना क्षेत्र के नगला माडौर स्थित भारतीय इंटर कॉलेज में आयोजित एक महापंचायत से संबंधित है।
  • आरोप: पुलिस दर्ज एफआईआर के अनुसार, तत्कालीन प्रशासन की अनुमति न होने के बावजूद भारी भीड़ वहां पहुंची थी। आरोपियों पर धारा 144 (निषेधाज्ञा) का उल्लंघन करने, पुलिस बल के काम में बाधा डालने और भड़काऊ भाषणों के जरिए दो समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने के तहत धारा 188, 341, 353 (IPC) एवं 7-क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट के तहत मुकदमे दर्ज किए गए थे।
  • प्रमुख आरोपी: इस मामले में राज्य सरकार के मंत्री कपिल देव अग्रवाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, पूर्व मंत्री सुरेश राणा, अशोक कटारिया, पूर्व विधायक उमेश मलिक, संगीत सोम, साध्वी प्राची और सपा सांसद हरेंद्र मलिक समेत कुल 20-25 नेता आरोपी बनाए गए थे।

अदालत के आदेश के मुख्य आधार

अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 321 (अभियोजन वापस लेने की शक्ति) के तहत दायर सरकारी अर्जी को स्वीकार करते हुए निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर फैसला सुनाया:
  1. राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता: कोर्ट ने अवलोकन में पाया कि मामले की एफआईआर और परिस्थितियां दर्शाती हैं कि यह मुकदमा राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और भीड़ के आक्रोश से प्रेरित था, न कि किसी निजी रंजिश से।
  2. सामाजिक सौहार्द और जनहित: अदालत ने टिप्पणी की कि वर्तमान समय में क्षेत्र में सामाजिक और सांप्रदायिक स्थिरता कायम है। मुकदमा समाप्त होने से पक्षों के बीच आपसी संबंध बेहतर होंगे और जनप्रतिनिधि अधिक निष्ठा के साथ जनता की सेवा कर सकेंगे।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: किस कानून के तहत राज्य सरकार ने केस वापस लेने की मांग की?
उत्तर: राज्य सरकार ने भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 321 के तहत राज्यपाल की स्वीकृति के बाद अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था।
Q2: इस मामले में कौन-कौन से प्रमुख नेता आरोपी थे?
उत्तर: इसमें यूपी के मंत्री कपिल देव अग्रवाल, संजीव बालियान, सुरेश राणा, अशोक कटारिया, संगीत सोम, साध्वी प्राची और सपा सांसद हरेंद्र मलिक शामिल थे।

अस्वीकरण: यह लेख समाचार और न्यायिक आदेशों की रिपोर्टिंग पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी प्रदान करना है।

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