JPSC-JSSC आंदोलन: रांची में पुलिस लाठीचार्ज के बाद गरमाई राजनीति, CCTV फुटेज से उपद्रवियों की पहचान जारी

Saransh Kanaujia
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रांची । मंगलवार, 11 अगस्त 2026
झारखंड की राजधानी रांची में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पारदर्शिता की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन चरम पर पहुंच गया है। 10 अगस्त को हुए उग्र विधानसभा घेराव और पुलिस-छात्र टकराव के बाद अब यह मुद्दा प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ राज्य की राजनीति का मुख्य केंद्र बन गया है।

10 अगस्त को विधानसभा घेराव और पुलिसिया कार्रवाई

भर्ती प्रक्रियाओं में सुधार और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हजारों अभ्यर्थियों ने 10 अगस्त को रांची में विधानसभा की ओर रुख किया। प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए बहुस्तरीय बैरिकेडिंग और कंटीले तारों से क्षेत्र को घेर दिया गया था।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों के आगे बढ़ने और बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने:
  • वॉटर कैनन (पानी की बौछार) का प्रयोग किया
  • आंसू गैस के गोले दागे
  • लाठीचार्ज कर भीड़ को पीछे खदेड़ा
इस टकराव में 14 पुलिसकर्मियों समेत कई अभ्यर्थियों को गंभीर चोटें आई हैं। छात्रों ने पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग और बर्बरता का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस का दावा है कि स्थिति को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीमित बल प्रयोग आवश्यक था।

CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस, उपद्रवियों की पहचान जारी

झड़प के बाद रांची पुलिस ने 10 अगस्त के घटनाक्रम की CCTV फुटेज, ड्रोन वीडियो और उपलब्ध वीडियो रिकॉर्डिंग की गहनता से जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार:
  1. हिंसा भड़काने, पथराव करने और बैरिकेड्स तोड़ने वालों की पहचान की जा रही है।
  2. साक्ष्यों का मिलान कर उपद्रवियों के खिलाफ नामजद और विधिक कार्रवाई की जाएगी।
  3. शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और जानबूझकर उपद्रव करने वाले तत्वों के बीच अंतर कर कार्रवाई होगी।

सड़क से सदन तक राजनीतिक संग्राम

पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में राजनीतिक हलचल भी काफी तेज हो गई है:
  • झारखंड बंद: लाठीचार्ज के विरोध में मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 11 अगस्त को राज्यव्यापी ‘झारखंड बंद’ का आह्वान किया, जिसका असर राज्य के कई जिलों में देखा गया।
  • ABVP कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन: मंगलवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने भी विधानसभा घेराव की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने लगभग 110 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।
  • विधानसभा में हंगामा: झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान NDA विधायकों ने भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली की CBI जांच की मांग को लेकर जोरदार हंगामा किया, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हुई।

छात्रों की मुख्य मांगें और देवेंद्र नाथ महतो का अनशन

आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का स्पष्ट रुख है कि राज्य सरकार द्वारा गठित किसी भी प्रशासनिक समिति से उन्हें न्याय नहीं मिलेगा। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
  • JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं की CBI से स्वतंत्र जांच
  • विवादित परीक्षाओं की समीक्षा और पारदर्शिता हेतु कड़े नियम
  • परीक्षा प्रणाली में व्यापक प्रशासनिक सुधार
दूसरी ओर, सरकार का पक्ष है कि अभ्यर्थियों की कई मांगों पर पहले ही संज्ञान लिया जा चुका है और कानूनी व तकनीकी सीमाओं के कारण सीधे परीक्षा रद्द करने या तत्काल CBI जांच सौंपने का अधिकार राज्य के पास सीमित है।
इसी बीच, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो लगातार 9 दिनों की भूख हड़ताल के बाद गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं, जिससे अभ्यर्थियों का गुस्सा और गहरा गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का रांची में आंदोलन क्यों हो रहा है?
उत्तर: अभ्यर्थी JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और धांधली की CBI जांच कराने और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
Q2: 10 अगस्त को रांची में क्या हुआ था?
उत्तर: हजारों अभ्यर्थियों ने रांची स्थित झारखंड विधानसभा की ओर मार्च किया था। बैरिकेड्स पार करने के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच झड़प हुई, जिसमें पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।
Q3: पुलिस उपद्रवियों की पहचान कैसे कर रही है?
उत्तर: रांची पुलिस 10 अगस्त के घटनाक्रम की CCTV फुटेज और अन्य वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिए पथराव करने और तोड़फोड़ में शामिल लोगों को चिह्नित कर कानूनी कार्रवाई कर रही है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह समाचार लेख उपलब्ध प्राथमिक जानकारियों, प्रत्यक्षदर्शियों के दावों और प्रशासनिक बयानों पर आधारित है। घटनाक्रम से जुड़े तथ्य पुलिस जांच एवं आधिकारिक सरकारी ज्ञापनों के अधीन हैं।

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