झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026: कांग्रेस के एकतरफा फैसले से झामुमो नाराज, क्या टूटेगा गठबंधन का गणित?

रांची । शुक्रवार, 5 जून 2026

झारखंड की दो राज्यसभा सीटों पर 18 जून को होने वाले चुनाव ने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है। सत्तारूढ़ महागठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। कांग्रेस आलाकमान द्वारा बिना किसी पूर्व चर्चा या सहमति के एकतरफा फैसला लेते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे के करीबी प्रणव झा को उम्मीदवार बनाए जाने से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के भीतर भारी नाराजगी है।

शुक्रवार को रांची के कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास पर झामुमो विधायकों की एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई। इस बैठक में विधायकों ने एक सुर में कांग्रेस के इस कदम का विरोध किया और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने के लिए अधिकृत कर दिया है।

तल्खी की वजह: क्यों असहज है झामुमो?

बैठक के बाद झामुमो के वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों के बयानों से साफ संकेत मिले हैं कि पार्टी दोनों सीटों पर चुनाव लड़ने पर गंभीरता से विचार कर रही है। झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने सीधे शब्दों में कहा कि कांग्रेस ने क्षेत्रीय दल की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।

नाराजगी की कुछ मुख्य वजहें इस प्रकार हैं:

  • सहयोगियों की अनदेखी: झामुमो का तर्क है कि इस फैसले में न तो उनसे चर्चा की गई और न ही गठबंधन के अन्य सहयोगियों जैसे राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और भाकपा-माले (CPI-ML) को विश्वास में लिया गया।

  • पुरानी कसक: कार्यकर्ताओं की बैठक में बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान झामुमो को सम्मानजनक सीटें न मिलने का मुद्दा भी एक बार फिर गरमा गया।

राज्यसभा चुनाव का गणित: क्या कहता है आंकड़ों का खेल?

झारखंड विधानसभा में कुल 81 सीटें हैं। राज्यसभा की एक सीट पर सीधे जीत दर्ज करने के लिए किसी भी उम्मीदवार को न्यूनतम 28 प्रथम वरीयता वाले वोटों (First Preference Votes) की आवश्यकता होती है।

वर्तमान में दलगत स्थिति और गठबंधन के आंकड़े कुछ इस प्रकार हैं:

राजनीतिक दल / गठबंधन विधायकों की संख्या राज्यसभा के लिए आवश्यक वोट (2 सीटों हेतु)
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) 34 28 (पहली सीट के लिए सुरक्षित)
कांग्रेस (Congress) 16
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) 04
भाकपा माले (CPI-ML) 02
सत्तारूढ़ गठबंधन (कुल) 56 56 (दोनों सीटें आसानी से जीतने योग्य)
विपक्ष (NDA – BJP व अन्य) 24 28 से 4 वोट कम (एक सीट के लिए)

महत्वपूर्ण विश्लेषण: हालांकि आंकड़ों के लिहाज से सत्तारूढ़ गठबंधन के पास कुल 56 ($34+16+4+2$) विधायक हैं, जो दो सीटों को जीतने के जादुई आंकड़े ($28 \times 2 = 56$) को पूरी तरह संतुष्ट करते हैं। लेकिन पेंच यह है कि झामुमो के अपने बूते 34 विधायक हैं। अपनी एक सीट सुरक्षित करने के बाद झामुमो के पास केवल 6 अतिरिक्त वोट बचेंगे। कांग्रेस के अपने 16 विधायकों के साथ यदि इन 6 वोटों को जोड़ भी दिया जाए, तो आंकड़ा 22 तक ही पहुंचता है। कांग्रेस को जीतने के लिए RJD (4) और माले (2) के सभी वोटों की अनिवार्य जरूरत होगी, जिन्हें पहले ही नाराज किया जा चुका है।

खाली हुई सीटों का इतिहास

यह चुनाव मुख्य रूप से दो प्रमुख वजहों से हो रहा है:

  1. झामुमो के दिग्गज नेता शिबू सोरेन के दुखद निधन के बाद खाली हुई सीट।

  2. भाजपा सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है।

नामांकन की प्रक्रिया 1 जून से शुरू होकर 8 जून तक चलेगी, जबकि मतदान और मतगणना दोनों 18 जून 2026 को प्रस्तावित हैं।

क्या एनडीए (NDA) करेगा उलटफेर?

विपक्षी गठबंधन (भाजपा, आजसू, जदयू) के पास वर्तमान में 24 विधायक हैं। उन्हें अपनी एक सीट निकालने के लिए भी 4 अतिरिक्त वोटों की जरूरत है। भाजपा के प्रदेश नेतृत्व का कहना है कि वे राजनीतिक परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए हैं और यदि महागठबंधन के भीतर क्रॉस-वोटिंग या असंतोष बढ़ता है, तो वे अंतरात्मा की आवाज पर अन्य विधायकों का समर्थन हासिल कर बाजी पलट सकते हैं।

आगे की राह: सोरेन के पाले में गेंद

तनाव के बीच कांग्रेस डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई गई है, जिसके बाद उनके वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश करेंगे। अब देखना दिलचस्प होगा कि हेमंत सोरेन अपने कार्यकर्ताओं की दोनों सीटों पर लड़ने की मांग को स्वीकार करते हैं या फिर सरकार के स्थायित्व और राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन को बचाए रखने के लिए कांग्रेस के प्रत्याशी को समर्थन देने के लिए मान जाते हैं।

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