UP कैबिनेट का बड़ा फैसला: ओला-उबर के लिए लाइसेंस अनिवार्य, अब यूपी में बदल जाएंगे टैक्सी संचालन के नियम

Saransh Kanaujia
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं (Aggregators) को और अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में ‘उत्तर प्रदेश मोटरयान समूह व वितरण सेवा प्रदाता नियमावली-2026’ को मंजूरी दे दी गई है। इस नए कानून के लागू होने के बाद अब ओला (Ola) और उबर (Uber) जैसी कंपनियों के लिए राज्य में पंजीकरण और लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।

लाइसेंस के लिए ढीली करनी होगी जेब

नई नियमावली के तहत सरकार ने स्पष्ट रूप से शुल्क का ढांचा तय कर दिया है। अब किसी भी ऐप आधारित टैक्सी कंपनी को प्रदेश में संचालन शुरू करने के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन करना होगा:

  • पंजीकरण शुल्क: ₹25,000 (एकमुश्त)

  • लाइसेंस शुल्क: ₹5,00,000 (संचालन की अनुमति हेतु)

  • नवीनीकरण (Renewal): ₹5,000

एक बार लाइसेंस प्राप्त करने के बाद, ये कंपनियां राज्य भर में अपनी सेवाओं का विस्तार कर सकेंगी और वाहनों की संख्या पर कोई विशेष प्रतिबंध नहीं होगा।

यात्री सुरक्षा अब ‘टॉप प्रायोरिटी’

परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि इन नियमों का मुख्य उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। अब टैक्सी बुकिंग के दौरान ऐप पर यात्रियों को न केवल ड्राइवर का नाम, बल्कि निम्नलिखित जानकारियां भी अनिवार्य रूप से दिखेंगी:

  1. चालक का पुलिस सत्यापन (Police Verification) की स्थिति।

  2. वाहन की फिटनेस और उसका पंजीकरण विवरण

  3. वाहन से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज।

“यह व्यवस्था यात्रियों को एक सुरक्षित और भरोसेमंद यात्रा का अनुभव देगी। अब किसी भी वाहन या चालक की पहचान छुपाना संभव नहीं होगा।” — दयाशंकर सिंह, परिवहन मंत्री

UPSRTC भी होगा हाई-टेक, आएगा अपना ऐप

प्राइवेट कंपनियों को टक्कर देने और सरकारी सेवाओं को सुलभ बनाने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) भी जल्द ही अपना खुद का मोबाइल ऐप लॉन्च करेगा। इसके माध्यम से यात्री सरकारी बसों की बुकिंग और रूट की जानकारी रीयल-टाइम में प्राप्त कर सकेंगे।

केंद्र के नियमों पर आधारित है नई पॉलिसी

यूपी सरकार का यह फैसला भारत सरकार द्वारा 1 जुलाई 2025 को मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 93 में किए गए संशोधनों के अनुरूप है। केंद्र के निर्देशों को राज्य की परिस्थितियों के अनुसार ढालते हुए यह नई नियमावली तैयार की गई है।

अटका है अनुबंधित बसों का फैसला:

हालांकि, कैबिनेट ने अनुबंधित बसों को अतिरिक्त रियायत देने वाले प्रस्ताव को फिलहाल टाल दिया है। सूत्रों के अनुसार, कुछ तकनीकी संशोधनों के बाद इसे दोबारा कैबिनेट में पेश किया जाएगा।

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