मद्रास हाई कोर्ट में थलपति विजय के खिलाफ रिट याचिका: ‘पुलि’ फिल्म आयकर मामला फिर चर्चा में

Saransh Kanaujia
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चेन्नई । गुरुवार, 7 मई 2026

तमिल सिनेमा के सुपरस्टार और ‘तमिलगा वेट्ट्रि कझगम’ (TVK) के संस्थापक अध्यक्ष विजय एक बार फिर कानूनी सुर्खियों में हैं। मद्रास उच्च न्यायालय ने अभिनेता के खिलाफ कथित आयकर अनियमितताओं के संबंध में एक रिट याचिका को नंबर (संजालित) कर दिया है। यह मामला लगभग एक दशक पुराना है, जो 2015 में रिलीज हुई उनकी फिल्म ‘पुलि’ (Puli) से जुड़ा है।

क्या है पूरा मामला? (The Core Dispute)

मामले की जड़ें साल 2015 में जाती हैं, जब फिल्म ‘पुलि’ की रिलीज के दौरान आयकर विभाग ने विजय के ठिकानों पर व्यापक छापेमारी की थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि:

  • नकद लेनदेन: फिल्म के निर्माताओं, पी.टी. सेल्वकुमार और शिबू (एसकेटी स्टूडियोज) ने कथित तौर पर विजय को 16 करोड़ रुपये चेक के माध्यम से और 4.93 करोड़ रुपये नकद दिए थे।

  • TDS का उल्लंघन: याचिकाकर्ता का दावा है कि केवल चेक से दी गई राशि पर ही टीडीएस (TDS) काटा गया, जबकि नकद भुगतान को आधिकारिक रिकॉर्ड से बाहर रखा गया।

  • आय का खुलासा: आयकर कार्यवाही के दौरान, विजय ने कथित तौर पर 5 करोड़ रुपये नकद प्राप्त करने की बात स्वीकार की थी और उस पर कर चुकाने की सहमति दी थी। बाद में उन्होंने वित्त वर्ष 2015-16 के लिए 15 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय का ‘स्वैच्छिक’ खुलासा भी किया था।

कोर्ट की कार्यवाही और वर्तमान स्थिति

यह याचिका पिछले महीने दायर की गई थी, लेकिन कोर्ट की रजिस्ट्री ने शुरू में इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। हालांकि, 8 अप्रैल को चीफ जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की बेंच ने निर्देश दिया कि याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।

अब 6 मई 2026 को याचिका को आधिकारिक नंबर मिल गया है। कोर्ट अब इस बात पर विचार करेगा कि क्या इस मामले में विजय के खिलाफ FIR दर्ज करने के पर्याप्त आधार हैं।

राजनीतिक मायने (Political Implications)

विजय ने हाल ही में अपनी पार्टी तमिलगा वेट्ट्रि कझगम (TVK) लॉन्च की है और वे 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में एक बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में पुराने कानूनी मामलों का दोबारा खुलना उनकी राजनीतिक यात्रा के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उनके समर्थकों का मानना है कि यह उन्हें निशाना बनाने की कोशिश है, जबकि कानून के जानकारों का कहना है कि यह एक सामान्य न्यायिक प्रक्रिया है।

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