तमिलनाडु विधानसभा: हार के बाद भी उदयनिधि के तेवर बरकरार, सनातन पर फिर दिया विवादित बयान

Saransh Kanaujia
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चेन्नई मंगलवार, 12 मई 2026

तमिलनाडु की राजनीति में 2026 के विधानसभा चुनाव एक युगांतकारी मोड़ लेकर आए हैं। दशकों तक सत्ता के केंद्र में रही द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) को इस बार करारी हार का सामना करना पड़ा है। हालांकि, चुनावी झटके के बावजूद पार्टी के वरिष्ठ नेता और अब विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) उदयनिधि स्टालिन के रुख में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है।

मंगलवार, 12 मई 2026 को नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (अभिनेता थलपति विजय) की उपस्थिति में सदन को संबोधित करते हुए उदयनिधि ने एक बार फिर ‘सनातन धर्म’ पर प्रहार किया।

विधानसभा में क्या कहा उदयनिधि ने?

विधानसभा सत्र के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने अपने पुराने स्टैंड को दोहराते हुए कहा:

“सनातन, जिसने लोगों को जन्म और जाति के आधार पर बाँटा है, उसका अंत होना चाहिए। यह मानवता और समानता के विरुद्ध है।”

यह बयान उस समय आया जब सदन में नई सरकार के गठन और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा हो रही थी। मुख्यमंत्री विजय, जिन्होंने हाल ही में सत्ता संभाली है, की मौजूदगी में दिए गए इस बयान ने राज्य में एक बार फिर वैचारिक युद्ध छेड़ दिया है।

न्यायालय की ‘हेट स्पीच’ वाली टिप्पणी

उदयनिधि के लिए यह राह आसान नहीं है। जनवरी 2026 में, मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। कोर्ट ने उदयनिधि द्वारा 2023 में दिए गए ‘सनातन उन्मूलन’ वाले बयान को स्पष्ट रूप से ‘हेट स्पीच’ की श्रेणी में रखा था।

जस्टिस एस. श्रीमथी ने भाजपा नेता अमित मालवीय के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करते हुए कहा था कि जब सत्ता में बैठा कोई व्यक्ति किसी धर्म के समूल नाश की बात करता है, तो उसे अभिव्यक्ति की आजादी नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने इसे ‘सांस्कृतिक नरसंहार’ (Culturicide) के आह्वान के समान बताया था।

विवादों का पुराना नाता

याद रहे कि सितंबर 2023 में उदयनिधि ने सनातन धर्म की तुलना ‘डेंगू, मलेरिया और कोरोना’ जैसी बीमारियों से की थी। उन्होंने तर्क दिया था कि सनातन का विरोध करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे पूरी तरह खत्म कर देना चाहिए। उस समय वे राज्य के खेल विकास मंत्री थे।

निष्कर्ष और राजनीतिक असर

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि DMK की हालिया हार के पीछे ‘सनातन विरोधी’ छवि भी एक बड़ा कारण रही है। इसके बावजूद, उदयनिधि का इस मुद्दे पर अड़े रहना यह दर्शाता है कि वे अपनी द्रविड़ियन विचारधारा से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली नई सरकार के सामने चुनौती होगी कि वे विपक्ष के इन तीखे हमलों और राज्य की कानून-व्यवस्था के बीच कैसे संतुलन बिठाते हैं।

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