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उत्तर प्रदेश में बर्ड फ्लू की दस्तक के कारण कानपुर सहित कई शहरों में चिड़ियाघर बंद

Saransh Kanaujia
3 Min Read

लखनऊ. प्रदेश सरकार ने गोरखपुर में स्थित शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान में मृत बाघिन में बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद लखनऊ, कानपुर व गोरखपुर चिड़ियाघर के साथ ही इटावा लायन सफारी को अगले सात दिनों के लिए बंद कर दिया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव अनुराधा वेमूरी ने मंगलवार को इसके आदेश जारी कर दिए। इस दौरान प्राणि उद्यान के सभी वन्य जीवों की सघन निगरानी की जाएगी और लक्षणों के आधार पर समुचित चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। चिड़ियाघर के आस-पास वन्य जीव या बर्ड फ्लू से संबंधित पक्षी या फिर जीवों की असामान्य मृत्यु पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।

इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को अपने आवास पांच कालिदास मार्ग में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में प्राणि उद्यानों, पक्षी विहारों, नेशनल पार्कों, वेटलैंड क्षेत्रों और गो-आश्रय स्थलों में संरक्षित पशु-पक्षियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस संक्रमण को रोकने के लिए केंद्र व राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सभी आवश्यक कदम तत्परता से उठाए जाएं। प्राणि उद्यान परिसरों को नियमित रूप से सैनेटाइज किया जाए। सभी वन्य जीवों एवं पक्षियों की जांच की जाए और उनके आहार की गहन जांच के बाद ही उन्हें भोजन उपलब्ध कराया जाए।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सभी कर्मचारियों को एवियन इंफ्लुएंजा से संबंधित विस्तृत जानकारी दी जाए तथा उन्हें पीपीई किट सहित आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। बाड़ों में नियुक्त कर्मचारियों की ड्यूटी जोखिम के स्तर को ध्यान में रखते हुए तय की जाए। प्रदेश के सभी पोल्ट्री फार्मों की मानकों के अनुरूप विशेष निगरानी की जाए और पोल्ट्री उत्पादों के आवागमन पर सतत नियंत्रण रखा जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि एवियन इंफ्लुएंजा एच-5 के मनुष्यों पर पड़ने वाले प्रभावों का भी स्वास्थ्य विभाग गहन समीक्षा करे ताकि संक्रमण की कोई भी कड़ी मानव समाज तक न पहुंच पाए।

योगी ने कहा कि केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण नई दिल्ली, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र स्वास्थ्य मंत्रालय, मत्स्यपालन एवं डेयरी विभाग, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान बरेली आदि से नियमित संपर्क बनाकर सुझाव लिए जाएं और उनका पालन भी किया जाए। जिला प्रशासन, मुख्य चिकित्सा अधिकारी और मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी के बीच समन्वय को सशक्त बनाया जाए ताकि सभी निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित हो सके।

साभार : दैनिक जागरण

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