इजरायल की महिला कमांडो लेबनान में सैन्‍य अभियान चला मचाई तबाही

Saransh Kanaujia
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तेल अवीव. इजराइल के सैन्य इतिहास में पहली बार महिला कॉम्बैट सैनिकों ने एक खास ऑपरेशनल मिशन के लिए लेबनान में एंट्री की है। मेजर जनरल ओरी गोर्डिन ने दक्षिणी लेबनान में लड़ाकू खुफिया बटालियन की एक टीम की तैनाती को मंजूरी दी थी। इसके बाद महिला सौनिकों की यूनिट ने एंट्री ली और अहम जानकारी जुटाई। लेबनान में इजरायल के हमले के बाद से महिला सैनिकों वाली लड़ाकू खुफिया टीम को सीरिया सीमा और माउंट डोव क्षेत्र में तैनात किया गया था।

सीरिया बॉर्डर और माउंट डोव क्षेत्र में तैनात इजरायली महिला सैनिकों वाली लड़ाकू खुफिया टीम को खुफिया जानकारी इकट्ठा करना, विद्रोही गुटों की पहचान करना, लक्ष्य सूची बनाना और खतरों को बेअसर करने के लिए जमीन और हवाई बलों को निर्देशन करना शामिल था। ईट बटालियन की 21 वर्षीय सिपाही कॉर्पोरल तेहिला ने यरूशलम पोस्ट से बात करते हुए कहा कि दक्षिणी लेबनान में हम पैदल ही अंदर गए। 20 वर्षीय कॉर्पोरल शेनी ने कहा कि हम लेबनान में करीब 1.5 किलोमीटर तक चले। हमने युद्ध के बाद से इजरायली बलों से अछूते क्षेत्रों में प्रवेश किया।

महिला सैनिकों ने हासिल की अहम जानकारी

इजरायली महिला सैनिकों ने खुलासा किया कि मिशन के तहत उन्होंने एंटी-टैंक मिसाइल साइटों, हिजबुल्लाह की इमारतों और दूसरे टारगेट के बारे में खुफिया जानकारी का खुलासा किया। कॉर्पोरल शेनी ने कहा कि हमने अपनी तस्वीरों के आधार पर टैंक फायर का मार्गदर्शन किया। हमने जो तस्वीरें लीं, उनमे घरों और गांवों के अंदर हिजबुल्लाह के हथियार दिखाई दे रहे थे। इसके बाद हमारे लड़ाकू हेलीकॉप्टरों ने उन लक्ष्यों पर हमला किया।

कॉर्पोरल शेनी ने कहा कि हम लेबनान में प्रवेश करने वाली पहली महिला लड़ाकू टीम हैं। अपने परिवार को यह बताना भावुक कर देने वाला था। मेरी मां इससे परेशान हुई लेकिन मेरे पिता को गर्व था। इस समय कोई डर नहीं है, बस एड्रेनालाईन है। आप पूरी तरह से मिशन पर ध्यान केंद्रित करें। कॉर्पोरल तेहिला ने कहा कि महिला सैनिकों को सिर्फ एक मौके का इंतजार था और उन्होंने करके दिखाया।

हिजबुल्लाह के गढ़ तक पहुंची महिला सैनिक

रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली महिला सैनिकों की टीम ने शुरू में हिजबुल्लाह गतिविधि वाले एक गांव के पास 24 घंटे से अधिक समय तक जांच की योजना बनाई थी लेकिन इलाके में आग लगने की घटना के बाद उनको वहां से निकलना पड़ा। मिशन पर सैनिकों ने कहा कि उनका ध्यान पूरी तरह से अपनी स्थिति को छिपाने और खुफिया जानकारी इकट्ठा करने पर था।

साभार : नवभारत टाइम्स

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