जामिया में ‘युवा कुंभ’ पर रार: छात्र संगठनों का भारी विरोध, कैंपस के बाहर सुरक्षा सख्त

Saransh Kanaujia
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नई दिल्ली | मंगलवार, 28 अप्रैल 2026  

नई दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) विश्वविद्यालय में मंगलवार (28 अप्रैल 2026) को माहौल उस समय गरमा गया जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में ‘युवा कुंभ’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के खिलाफ वामपंथी और इस्लामी छात्र संगठनों ने मोर्चा खोल दिया, जिससे कैंपस के बाहर भारी तनाव की स्थिति पैदा हो गई।

विरोध की मुख्य वजह

छात्र संगठनों, विशेष रूप से ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने इस आयोजन को “सांप्रदायिक एजेंडे” का हिस्सा बताया। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक ऐसी संस्था को परिसर में जगह दी है, जिसका भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में कोई ऐतिहासिक योगदान नहीं रहा है।

प्रदर्शनकारी छात्रों ने कैंपस के गेट पर इकट्ठा होकर ‘आरएसएस गो बैक’ और ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे लगाए। उनका कहना है कि जामिया जैसे अल्पसंख्यक संस्थान में इस तरह के आयोजन छात्रों की गरिमा और सुरक्षा के खिलाफ एक “प्रत्यक्ष उकसावा” हैं।

प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई

स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की कई कंपनियों को विश्वविद्यालय के मुख्य गेट और इंजीनियरिंग विभाग (जहां कार्यक्रम आयोजित था) के बाहर तैनात किया गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए कड़ी बैरिकेडिंग की। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच हल्की झड़प भी हुई, जिसमें पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया।

छात्र संगठनों का आधिकारिक बयान

SFI और AISA ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा:

“जामिया की धरती पर नफरत की राजनीति के लिए कोई स्थान नहीं है। प्रशासन ने जिस तरह से इस कार्यक्रम को अनुमति दी है, वह विश्वविद्यालय के लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। हम इस ‘भगवाकरण’ के प्रयास का विरोध जारी रखेंगे।”

वहीं, NSUI ने भी प्रशासन के इस कदम को “दोहरा मापदंड” बताया और कहा कि जहां छात्र-हित के कार्यक्रमों पर पाबंदी लगाई जाती है, वहीं राजनीतिक संगठनों को खुली छूट दी जा रही है।

कार्यक्रम का उद्देश्य

दूसरी ओर, ‘युवा कुंभ’ के आयोजकों का कहना है कि यह कार्यक्रम युवाओं को राष्ट्र-निर्माण और सेवा के प्रति प्रेरित करने के लिए आयोजित किया गया था। यह आरएसएस के 100 गौरवशाली वर्षों की सेवा यात्रा को युवाओं तक पहुंचाने का एक माध्यम है। विरोध के बावजूद, विश्वविद्यालय के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और वीसी की उपस्थिति में कार्यक्रम का संक्षिप्त सत्र संपन्न हुआ।

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