17वीं सदी का ‘स्मार्टफोन’: महारानी गायत्री देवी का दुर्लभ एस्ट्रोलैब अब सोथबी की नीलामी में

Saransh Kanaujia
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लंदन । सोमवार, 27 अप्रैल 2026

जयपुर की शाही विरासत एक बार फिर वैश्विक स्तर पर चर्चा का केंद्र बनी हुई है। इस बार कारण कोई महल या आभूषण नहीं, बल्कि पीतल का बना एक छोटा सा यंत्र है, जिसे इतिहासकार ’17वीं सदी का सुपर कंप्यूटर’ या ‘मुगल काल का स्मार्टफोन’ कह रहे हैं। यह दुर्लभ एस्ट्रोलैब (Astrolabe) कभी जयपुर की राजमाता महारानी गायत्री देवी के निजी संग्रह की शोभा बढ़ाता था।

क्या है यह एस्ट्रोलैब और क्यों है यह इतना खास?

एस्ट्रोलैब एक प्राचीन खगोलीय यंत्र है जिसका उपयोग मध्यकाल में खगोलविदों और नाविकों द्वारा किया जाता था। 1612 में निर्मित यह विशिष्ट यंत्र अपनी बनावट और तकनीकी सूक्ष्मता के कारण अद्वितीय है।

1. विज्ञान और कला का संगम

इस यंत्र की सबसे बड़ी खूबी इसका द्विभाषी होना है। इस पर खगोलीय विवरण फारसी और संस्कृत (देवनागरी) दोनों लिपियों में खुदे हुए हैं। यह उस दौर के भारत में मौजूद वैज्ञानिक समन्वय और ‘गंगा-जमुनी’ तहजीब का एक जीवंत प्रमाण है।

2. मध्यकाल का जीपीएस (GPS)

इसे ‘सुपर कंप्यूटर’ इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि यह अकेले ही कई काम कर सकता था:

  • समय की गणना: दिन और रात के सटीक समय का पता लगाना।

  • दिशा ज्ञान: समुद्र या रेगिस्तान में यात्रा के दौरान दिशा निर्धारित करना।

  • शहरों का डेटा: इसमें दुनिया के 94 प्रमुख शहरों के अक्षांश (Latitude) और देशांतर (Longitude) की जानकारी अंकित है।

  • ज्योतिषीय गणना: ग्रहों की चाल और कुंडली मिलान में सहायता।

शाही विरासत से नीलामी तक का सफर

यह यंत्र मूल रूप से जयपुर के महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय के निजी संग्रह का हिस्सा था। उनकी मृत्यु के बाद यह उनकी पत्नी, प्रसिद्ध महारानी गायत्री देवी के पास रहा। जयपुर राजघराने का खगोल विज्ञान से पुराना नाता रहा है; महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने ही दिल्ली और जयपुर सहित पांच स्थानों पर जंतर-मंतर का निर्माण करवाया था। यह यंत्र उसी वैज्ञानिक परंपरा की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

नीलामी और संभावित कीमत

लंदन का मशहूर नीलामी घर सोथबी (Sotheby’s) इसकी नीलामी करने जा रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इसकी ऐतिहासिक महत्ता और दुर्लभता को देखते हुए इसकी बोली 16.5 करोड़ से 27.5 करोड़ रुपये (£1.5M – £2.5M) के बीच लग सकती है।

Fact Check

  • क्या यह वाकई ‘सुपर कंप्यूटर’ है? तकनीकी रूप से यह एक ‘एनालॉग कैलकुलेटर’ है। ‘सुपर कंप्यूटर’ शब्द का प्रयोग इसकी उस समय की जटिलता को समझाने के लिए एक उपमा के तौर पर किया जा रहा है।

  • कालखंड: इसका निर्माण 1612 का बताया गया है, जो मुगल बादशाह जहाँगीर का शासनकाल था। जहाँगीर स्वयं कला और विज्ञान के पारखी थे।

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