पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का ‘अस्तित्व’ खतरे में: UN ने जबरन धर्मांतरण पर जारी की चेतावनी

Saransh Kanaujia
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इस्लामाबाद । गुरुवार, 23 अप्रैल 2026

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों, विशेष रूप से हिंदू और ईसाई समुदायों की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र (UN) के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने एक रिपोर्ट जारी कर पाकिस्तान सरकार को आईना दिखाया है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि देश में नाबालिग लड़कियों का अपहरण, जबरन निकाह और धर्मांतरण अब एक ‘सिस्टमैटिक’ समस्या बन चुका है।

2025 के आंकड़े: हिंदू समुदाय सबसे अधिक निशाने पर

संयुक्त राष्ट्र द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 और 2026 की शुरुआत में सामने आए जबरन धर्मांतरण के मामलों में एक डरावना पैटर्न देखा गया है।

समुदाय पीड़ित प्रतिशत (लगभग) मुख्य आयु वर्ग
हिंदू 75% 14 से 18 वर्ष
ईसाई 25% 14 से 18 वर्ष

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कई मामलों में पीड़ितों की उम्र 13 वर्ष से भी कम पाई गई है। इन बच्चियों को गरीबी और सामाजिक अलगाव का फायदा उठाकर निशाना बनाया जाता है।

सिंध प्रांत: धर्मांतरण की ‘फैक्ट्री’?

पाकिस्तान के सिंध प्रांत से लगभग 80% मामले सामने आ रहे हैं। मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि सिंध में हिंदू आबादी अधिक है, जिसे स्थानीय प्रभावशाली धार्मिक नेता और कट्टरपंथी समूह सॉफ्ट टारगेट मानते हैं।

पुलिस और न्यायपालिका की भूमिका पर सवाल

संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार:

  1. पुलिस की लापरवाही: अक्सर पुलिस परिजनों की शिकायत दर्ज करने के बजाय अपहरणकर्ताओं का पक्ष लेती है।

  2. न्यायिक विफलता: निचली अदालतें अक्सर पीड़िता के उस बयान को आधार मानकर निकाह को वैध घोषित कर देती हैं, जो उसने भारी दबाव और डर के बीच दिया होता है।

  3. कानूनी खामियां: हालांकि पाकिस्तान में ‘चाइल्ड मैरिज रिस्ट्रेंट एक्ट 2025’ के जरिए शादी की उम्र 18 साल करने की कोशिश की गई है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका कार्यान्वयन शून्य है।

अंतरराष्ट्रीय दबाव और संभावित प्रतिबंध

UN की इस रिपोर्ट के बाद पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का खतरा मंडरा रहा है। मानवाधिकार संगठनों ने मांग की है कि जब तक पाकिस्तान अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए कड़े कानून नहीं बनाता, तब तक उसे मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहायता और व्यापारिक छूटों (जैसे GSP+) की समीक्षा की जानी चाहिए।

नोट :

  • उम्र की सीमा: संयुक्त राष्ट्र ने सिफारिश की है कि पूरे पाकिस्तान में शादी की न्यूनतम आयु अनिवार्य रूप से 18 वर्ष की जानी चाहिए।

  • दोषियों को सजा: अब तक जबरन धर्मांतरण के मामलों में सजा की दर 1% से भी कम है, जिसे बढ़ाने के लिए विशेष अदालतों की मांग की गई है।

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