अयोध्या । अपडेटेड : शनिवार, 27 जून 2026
अयोध्या के ऐतिहासिक और भव्य श्री राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा आस्था के साथ चढ़ाए गए दान (चढ़ावे) के कथित गबन मामले में कानून का शिकंजा कस गया है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर गिरफ्तार किए गए सभी आठ आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में जेल भेज दिया गया है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में जहां एक ओर प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है, वहीं दूसरी ओर राम मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष अधिकारियों के इस्तीफे को लेकर उड़ रही अफवाहों पर भी आधिकारिक बयान आ गया है। आइए जानते हैं इस पूरे मामले का सच, अब तक की कानूनी कार्रवाई और प्रशासनिक सुधारों की पूरी टाइमलाइन।
अदालत का सख्त फैसला: सभी 8 आरोपी भेजे गए न्यायिक हिरासत में
राम मंदिर में दान राशि की हेराफेरी के आरोप में पुलिस ने जिन आठ लोगों को नामजद कर गिरफ्तार किया था, उन्हें शुक्रवार को स्थानीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। मामले से जुड़े पुख्ता तकनीकी साक्ष्यों और एसआईटी (SIT) की प्राथमिक रिपोर्ट को देखते हुए अदालत ने सभी आठों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दे दिया।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, अब जांच का दायरा और कड़ा किया जाएगा। आने वाले दिनों में इन आरोपियों के खिलाफ निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:
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वित्तीय लेनदेन और बैंक रिकॉर्ड्स: आरोपियों के निजी बैंक खातों और उनके रिश्तेदारों के खातों की स्क्रूटनी की जा रही है ताकि अवैध संपत्ति का पता लगाया जा सके।
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डिजिटल फॉरेंसिक और सीसीटीवी फुटेज: मंदिर परिसर के कैश काउंटिंग रूम (नकद गिनती कक्ष) के पुराने और डिलीट किए गए सीसीटीवी फुटेज को रिकवर करने के लिए एक्सपर्ट्स की मदद ली जा रही है।
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नेटवर्क ट्रैकिंग: पुलिस यह पता लगा रही है कि क्या इस चोरी के पीछे कोई बड़ा अंतरराज्यीय गिरोह या बाहरी मास्टरमाइंड काम कर रहा था।
चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे के दावों पर ट्रस्ट का बड़ा बयान
सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक हलकों में यह अफवाह तेजी से फैल रही थी कि ‘नैतिक जिम्मेदारी’ लेते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और वरिष्ठ ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स और ट्रस्ट के अध्यक्ष के आधिकारिक बयान ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज और निराधार बताया है।
आधिकारिक स्थिति: ट्रस्ट के अध्यक्ष ने साफ किया है कि दोनों वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अपने पदों से कोई इस्तीफा नहीं दिया है। वे पहले की तरह ही पूरी निष्ठा से अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं।
भ्रम की स्थिति क्यों बनी?
ट्रस्ट के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि जब शुरुआती प्रशासनिक चर्चाएं चल रही थीं, तब ‘नैतिक जिम्मेदारी’ शब्द का जिक्र हुआ था। इसी आंतरिक चर्चा को तोड़-मरोड़कर अफवाहों और सोशल मीडिया पोस्ट का हिस्सा बना दिया गया, जिसे अब आधिकारिक रूप से पूरी तरह खारिज कर दिया गया है।
वर्तमान प्रशासनिक और कानूनी स्थिति: एक नजर में
नीचे दी गई तालिका से आप समझ सकते हैं कि इस समय अयोध्या मंदिर प्रबंधन और पुलिस जांच की क्या स्थिति है:
| विषय (Category) | वर्तमान स्टेटस (ताजा अपडेट) |
| ट्रस्ट का प्रबंधन | चंपत राय (महासचिव) और डॉ. अनिल मिश्रा अपने पदों पर मजबूती से बने हुए हैं। |
| कानूनी कार्रवाई | गिरफ्तार किए गए सभी 8 आरोपी अदालत के आदेशानुसार न्यायिक हिरासत (जेल) में हैं। |
| जांच की प्रगति | SIT बैंक रिकॉर्ड्स, वित्तीय लेनदेन और कैश काउंटिंग रूम के सीसीटीवी फुटेज की जांच जारी रखे हुए है। |
| प्रशासनिक बदलाव | कैश काउंटिंग टीम के पुराने स्टाफ को तत्काल प्रभाव से हटाकर नए पारदर्शी नियमों को लागू किया गया है। |
क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ इसका भंडाफोड़?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब राम मंदिर में आने वाले नकद चढ़ावे और अन्य कीमती सामग्रियों (सोने-चांदी के अवशेषों) की गिनती के दौरान बड़े पैमाने पर विसंगतियां (Irregularities) पाई गईं। विपक्ष और कुछ अन्य सामाजिक संगठनों द्वारा करीब 7 से 7.5 करोड़ रुपये के गबन के आरोप लगाए जाने के बाद माहौल गरमा गया था।
जनता की आस्था और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए, ट्रस्ट की ही लिखित सिफारिश पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने 14 जून को एक 3-सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था।
SIT की जांच में सामने आई चौंकाने वाली कमियां:
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सीसीटीवी कैमरों से छेड़छाड़: जांच दल ने पाया कि कैश काउंटिंग टीम में शामिल कुछ लोग और बैंक के पूर्व कर्मचारी दान पेटियों से सीधे तौर पर हेराफेरी कर रहे थे। चोरी छिपाने के लिए वे जानबूझकर कैमरों के सामने आ जाते थे या उनके एंगल को बाधित करते थे।
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प्रोटोकॉल का उल्लंघन: कैश काउंटिंग रूम में तैनात कर्मचारियों के लिए तय किए गए सख्त ड्रेस कोड (बिना जेब वाले कपड़े) और तलाशी नियमों का कड़ाई से पालन नहीं किया जा रहा था।
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एफआईआर और धाराएं: आरोपियों पर चोरी, आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust), धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश रचने की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
सरकार और पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। आने वाले 15 दिनों में एसआईटी अपनी अंतिम और विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
