जबलपुर । गुरुवार, 25 जून 2026
मध्य प्रदेश की राजनीति और न्यायपालिका से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आखिरकार केंद्रीय मंत्री व मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान से जुड़े मानहानि के एक मामले में कोर्ट के समक्ष लिखित रूप से खेद व्यक्त कर दिया है। जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (MP High Court) की एकलपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
क्या है पूरा मामला? (2018 का झाबुआ चुनावी भाषण)
यह विवाद साल 2018 का है, जब मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान झाबुआ में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने राज्य सरकार पर तीखे हमले किए थे। अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने वैश्विक स्तर पर चर्चित ‘पनामा पेपर्स लीक’ (Panama Papers Leak Scandal) घोटाले का जिक्र किया था।
आरोप है कि राहुल गांधी ने इस घोटाले के साथ कथित तौर पर तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम जोड़ दिया था। उन्होंने अपने बयान में कहा था कि मुख्यमंत्री के बेटे का नाम पनामा पेपर्स में आया है, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
निचली अदालत से हाई कोर्ट तक पहुंचा विवाद
इस बयान से नाराज होकर कार्तिकेय सिंह चौहान ने इसे अपनी छवि और प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिश बताया। उन्होंने भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट (Special MP-MLA Court Bhopal) में राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का परिवाद दायर कर दिया।
निचली अदालत ने मामले का संज्ञान लेते हुए राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने के लिए समन जारी किया था। इस समन और मानहानि की पूरी कार्यवाही को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने जबलपुर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और इसे निरस्त करने की मांग की थी।
राहुल गांधी ने लिखित आवेदन में क्या कहा?
न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ के समक्ष बुधवार (24 जून 2026) को हुई सुनवाई के दौरान राहुल गांधी के वकील ने एक लिखित आवेदन (Written Statement) पेश किया। इस आवेदन में कांग्रेस नेता ने साफ तौर पर कहा कि:
“साल 2018 में दिया गया उनका वह बयान एक गलतफहमी (Misunderstanding) और गलत तथ्यों पर आधारित था। उनका इरादा शिकायतकर्ता (कार्तिकेय सिंह चौहान) को निशाना बनाना नहीं था।”
राहुल गांधी ने इस गलतफहमी के तहत दिए गए बयान के लिए अदालत के सामने लिखित रूप से गहरा खेद (Regret) व्यक्त किया।
कार्तिकेय चौहान के वकील का पक्ष और कोर्ट का कदम
कार्तिकेय सिंह चौहान की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता संकल्प कोचर ने न्यूज़ एजेंसीज को बताया कि राहुल गांधी ने खुद लिखित रूप से अपनी गलती स्वीकार करते हुए खेद व्यक्त किया है। उन्होंने कहा, “चूंकि याचिकाकर्ता ने खुद माना है कि बयान गलत तथ्यों पर आधारित था और उन्होंने खेद व्यक्त किया है, इसलिए हमने कोर्ट के सामने अपना लिखित जवाब प्रस्तुत कर दिया है कि हम इस खेद को स्वीकार करते हुए मामले को बंद करने के पक्ष में हैं।”
गुरुवार (25 जून 2026) को दोनों पक्षों की दलीलें और लिखित जवाब पूरा होने के बाद, हाई कोर्ट की एकलपीठ ने इस याचिका पर अपना अंतिम आदेश सुरक्षित (Order Reserved) रख लिया है। माना जा रहा है कि कोर्ट जल्द ही इस केस को औपचारिक रूप से बंद करने का आदेश जारी कर सकता है।
