बरेली राशन विवाद: पीएम पर अभद्र टिप्पणी और राशन न देने के आरोपी आदिल अंसारी को पुलिस ने भेजा जेल, दुकान सील

Saransh Kanaujia
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बरेली | शुक्रवार, 24 जुलाई 2026

बरेली जिले के भुता थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम केसरपुर से एक चौकाने वाला मामला सामने आया है। सरकारी राशन वितरण के दौरान एक लाभार्थी के साथ अमर्यादित व्यवहार, धार्मिक आधार पर राशन देने से इनकार करने और प्रधानमंत्री सहित वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ अपशब्द कहने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस और नागरिक आपूर्ति (पूर्ति) विभाग ने कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है।

पुलिस ने मुख्य आरोपी आदिल अंसारी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेज दिया गया है। वहीं, पूर्ति विभाग की टीम ने त्वरित संज्ञान लेते हुए संबंधित राशन की दुकान को सील कर दिया है और वहाँ मौजूद सारा सरकारी खाद्यान्न जब्त कर लिया है।

जानिए क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम केसरपुर निवासी भगवन शरण राशन लेने के लिए स्थानीय कोटेदार ‘बाबू’ की सरकारी राशन दुकान पर गए थे। भगवन शरण का आरोप है कि दुकान पर मौजूद कोटेदार ने मशीन में उनका अंगूठा लगाने (ई-पॉश सत्यापन) से इनकार कर दिया।

जब भगवन शरण ने इस संबंध में कोटेदार के 22 वर्षीय पुत्र आदिल अंसारी से शिकायत की, तो वह कथित तौर पर उग्र हो गया। पीड़िता का आरोप है कि आदिल ने उनके साथ अभद्रता की और कहा:

“मेरे पिता ने कई हिंदुओं का अंगूठा नहीं लगवाया है और मैं भी किसी कीमत पर हिंदुओं को राशन नहीं दूंगा।”

इसके साथ ही आरोपी आदिल ने देश के प्रधानमंत्री और अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों के लिए बेहद आपत्तिजनक व अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया। जब पीड़ित भगवन शरण और अन्य ग्रामीणों ने इसका विरोध किया, तो आदिल अंसारी और उसके साथी नईम ने भगवन शरण के साथ मारपीट की। घटना का वीडियो बनता देख आरोपी ने बेफिक्र होकर कहा, “शौक से वीडियो बना लो।”

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद जागा प्रशासन

घटना के दौरान मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति द्वारा बनाए गए वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया गया। देखते ही देखते यह वीडियो विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो गया और स्थानीय स्तर पर व्यापक आक्रोश फैल गया।

मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए भुता थाना प्रभारी निरीक्षक रविंद्र कुमार ने तुरंत संज्ञान लिया। पुलिस ने पीड़ित भगवन शरण की तहरीर के आधार पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी की धरपकड़ के लिए टीमें गठित कीं।

नहर के पास ट्यूबवेल से गिरफ्तारी, कोर्ट के सामने मांगी माफी

शुक्रवार को पुलिस टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए मटकापुर नहर के पास स्थित भगनापुर गाँव के समीप एक ट्यूबवेल से मुख्य आरोपी आदिल अंसारी को हिरासत में ले लिया।

पुलिस जब आरोपी आदिल को न्यायिक प्रक्रिया के तहत न्यायालय ले जा रही थी, तब आरोपी हाथ जोड़कर रोता-बिलखता और अपनी हरकतों के लिए माफी मांगता नजर आया। अदालत में पेशी के बाद न्यायाधीश ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजते हुए जेल भेज दिया।

पूर्ति विभाग की बड़ी कार्रवाई: राशन दुकान सील, खाद्यान्न जब्त

इस मामले में नागरिक आपूर्ति विभाग (Food & Civil Supplies Department) ने भी त्वरित और सख्त रुख अपनाया है। जिला पूर्ति अधिकारी के निर्देश पर एक जांच दल ने केसरपुर स्थित विवादित राशन दुकान पर अचानक छापेमारी की।

  • दुकान की सीलबंदी: अधिकारियों ने मौके पर ही राशन की दुकान को सील कर दिया।

  • खाद्यान्न जब्ती: गोदाम/दुकान में मौजूद सभी सरकारी गेहूं और चावल को अपने कब्जे में लेकर पास की अन्य निष्पक्ष राशन दुकान से संबद्ध/जब्त कर लिया।

प्रशासन द्वारा की गई इस जीरो टॉलरेंस कार्रवाई से क्षेत्र के अन्य राशन विक्रेताओं और कोटेदारों में हड़कंप मचा हुआ है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQ)

प्रश्न 1: बरेली के भुता क्षेत्र में क्या घटना हुई थी?

उत्तर: भुता के केसरपुर गाँव में राशन दुकान पर कोटेदार के बेटे आदिल अंसारी पर एक हिंदू उपभोक्ता को राशन न देने, धार्मिक भेदभाव करने और प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करने का आरोप है।

प्रश्न 2: आरोपी के खिलाफ पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?

उत्तर: भुता पुलिस ने आईटी एक्ट और संबंधित आपराधिक धाराओं में केस दर्ज कर आरोपी आदिल अंसारी को गिरफ्तार किया और न्यायालय के आदेश पर उसे जेल भेज दिया है।

प्रश्न 3: क्या राशन की दुकान का लाइसेंस रद्द या दुकान सील की गई है?

उत्तर: जी हाँ, नागरिक पूर्ति विभाग ने तत्काल संज्ञान लेते हुए राशन दुकान को सील कर दिया है और उपलब्ध सरकारी राशन को जब्त कर लिया है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह समाचार लेख उपलब्ध प्राथमिक जानकारियों, पीड़ित की शिकायत, पुलिस प्राथमिकी (FIR) और स्थानीय प्रशासनिक सूत्रों के आधार पर तैयार किया गया है। मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम विधिक निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के अधीन होगा।

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