मुंबई: ससुराल में महिला का भीषण उत्पीड़न, ‘बेटी’ के डर से कराया जबरन गर्भपात; पीड़िता ने की बुलडोजर कार्रवाई की मांग

Saransh Kanaujia
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मुंबई | शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026  

मुंबई के साकी नाका की रहने वाली एक पीड़िता ने अपने पति वसीम अली शेख और ससुराल वालों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता के पिता के अनुसार, विवाह 1 दिसंबर 2019 को हुआ था। आरोपों के मुताबिक, आरोपी वसीम का शादी से पहले भी किसी अन्य महिला के साथ प्रेम संबंध था, जिसे उसने विवाह के बाद भी जारी रखा। जब पीड़िता ने इस बेवफाई का विरोध किया, तो उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा।

जबरन गर्भपात: एक जघन्य अपराध

मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा पीड़िता के परिजनों ने किया है। उनका आरोप है कि जब पीड़िता दूसरी बार गर्भवती हुई, तो ससुराल पक्ष ने चोरी-छिपे लिंग परीक्षण करवाया। भ्रूण के ‘बेटी’ होने की पुष्टि होते ही पीड़िता पर दबाव बनाया गया और कथित तौर पर उसका जबरन गर्भपात (Forced Abortion) करा दिया गया। भारतीय कानून के तहत बिना सहमति के गर्भपात कराना और लिंग परीक्षण करना गैर-कानूनी और गैर-जमानती अपराध है।

बुलडोजर कार्रवाई की मांग

पीड़िता का आक्रोश इस कदर है कि उसने सरकार से मांग की है कि जिस तरह अन्य राज्यों में अपराधियों के अवैध निर्माणों पर ‘बुलडोजर’ चलाया जाता है, वैसी ही कार्रवाई उसके पति के घर पर भी हो। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि महाराष्ट्र में सजा का निर्धारण अदालत के माध्यम से ही संभव है, लेकिन यह मांग पीड़िता के भीतर के गहरे असंतोष को दर्शाती है।

तथ्य 

इस संवेदनशील मामले में कुछ कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं को समझना आवश्यक है:

  • लिंग परीक्षण की अवैधता: भारत में PCPNDT अधिनियम के तहत लिंग की जांच करना अपराध है। यदि यह आरोप सिद्ध होता है, तो संबंधित डॉक्टर और अस्पताल पर भी कार्रवाई होगी।

  • दहेज और क्रूरता: यदि मारपीट का कारण संपत्ति या पैसों की मांग है, तो इसमें IPC की धारा 498A के तहत मामला दर्ज किया जाना अनिवार्य है।

  • पुलिस की भूमिका: फिलहाल पुलिस की आधिकारिक चार्जशीट और जांच रिपोर्ट का इंतजार है। केवल आरोपों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि न्यायालय का फैसला न आ जाए।

सहायता और संसाधन

यदि आप या आपके आसपास कोई घरेलू हिंसा का शिकार है, तो इन हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें:

  • महिला हेल्पलाइन: 181

  • पुलिस आपातकालीन सेवा: 100 / 112

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