ओडिशा का ‘डायमंड ट्रायंगल’ अब वर्ल्ड स्टेज पर: रत्नागिरि, ललितगिरि और उदयगिरि यूनेस्को की संभावित सूची में

भुवनेश्वर. ओडिशा के समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के लिए आज (24 जनवरी, 2026) का दिन ऐतिहासिक है। यूनेस्को (UNESCO) ने ओडिशा के प्रसिद्ध ‘डायमंड ट्रायंगल’ (Diamond Triangle) यानी रत्नागिरि, ललितगिरि और उदयगिरि को अपनी संभावित विश्व धरोहर सूची (Tentative List) में शामिल कर लिया है।

ओडिशा की प्राचीन बौद्ध विरासत ने एक बड़ी वैश्विक उपलब्धि हासिल की है। यूनेस्को ने राज्य के जाजपुर जिले में स्थित तीन प्रमुख बौद्ध स्थलों—रत्नागिरि, ललितगिरि और उदयगिरि—को ‘विश्व धरोहर स्थल’ की संभावित सूची में जगह दी है। ओडिशा सरकार ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे राज्य के पर्यटन और संरक्षण के लिए एक “ऐतिहासिक मील का पत्थर” बताया है।

🔹 क्या है ‘डायमंड ट्रायंगल’ (हीरा त्रिकोण)?

ओडिशा के इन तीन बौद्ध स्थलों को सामूहिक रूप से ‘डायमंड ट्रायंगल’ कहा जाता है। यह नाम बौद्ध धर्म के ‘वज्रयान’ संप्रदाय (जिसे ‘डायमंड व्हीकल’ भी कहा जाता है) के प्रभाव के कारण पड़ा है।

  • ललितगिरि: यह इस त्रिकोण का सबसे पुराना स्थल है (दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व)। यहाँ से भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष (bone relics) एक सोने के ताबूत में मिले थे।

  • रत्नागिरि: इसे ‘रत्नों का पहाड़’ कहा जाता है। यह अपने विशाल बौद्ध विहारों और कलात्मक नक्काशीदार दरवाजों के लिए प्रसिद्ध है। 7वीं से 10वीं शताब्दी के बीच यह बौद्ध शिक्षा का मुख्य केंद्र था।

  • उदयगिरि: ‘उगते सूरज का पहाड़’ के नाम से मशहूर यह स्थल इस त्रिकोण का सबसे बड़ा परिसर है। यहाँ के स्तूप और मठ अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए जाने जाते हैं।

📑 यूनेस्को की सूची में शामिल होने का महत्व

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने दिसंबर 2025 में इसके लिए नामांकन भेजा था। यूनेस्को के महानिदेशक ने पुष्टि की है कि यह प्रस्ताव सभी मानकों पर खरा उतरा है।

  1. वैश्विक पहचान: अब ये स्थल विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त करने के एक कदम और करीब आ गए हैं।

  2. पर्यटन को बढ़ावा: वैश्विक सूची में नाम आने से अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है।

  3. संरक्षण और शोध: इन प्राचीन मठों और शिलालेखों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी और वित्तीय मदद मिल सकेगी।

🏛️ सरकार की प्रतिक्रिया

ओडिशा की उपमुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्री प्रवती परिदा ने कहा, “यह हमारे प्राचीन ज्ञान से वैश्विक मान्यता तक का सफर है। यह उपलब्धि हमारी संस्कृति और विरासत के लिए गर्व की बात है।”

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