अमेरिका और WHO का ऐतिहासिक अलगाव: जिनेवा में हटा ‘सितारों वाला झंडा’, दुनिया में खलबली

वाशिंगटन. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अमेरिका के बीच दशकों पुराना रिश्ता आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 2025 में हस्ताक्षरित कार्यकारी आदेश के एक वर्ष बाद, अमेरिका अब इस वैश्विक संस्था का हिस्सा नहीं रहा।

78 वर्षों के साथ के बाद, संयुक्त राज्य अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से अपनी सदस्यता आधिकारिक तौर पर समाप्त कर ली है। कल गुरुवार को जिनेवा स्थित WHO मुख्यालय के बाहर से अमेरिका का राष्ट्रीय ध्वज हटा दिया गया, जो वैश्विक स्वास्थ्य कूटनीति में एक नए और अनिश्चित युग की शुरुआत का प्रतीक है।

🚩 झंडा हटाने की घटना और आधिकारिक पुष्टि

चश्मदीदों और राजनयिक सूत्रों के अनुसार, गुरुवार सुबह जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के अन्य सदस्य देशों के झंडों के बीच से अमेरिकी झंडे को औपचारिक रूप से उतार दिया गया। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और स्वास्थ्य सचिव रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर ने एक संयुक्त बयान जारी कर इसकी पुष्टि की।

⚠️ अलगाव के 5 मुख्य कारण

अमेरिकी प्रशासन ने WHO छोड़ने के पीछे निम्नलिखित तर्क दिए हैं:

  1. कोविड-19 प्रबंधन में विफलता: अमेरिका का आरोप है कि WHO वुहान (चीन) से शुरू हुई महामारी को रोकने और पारदर्शी जानकारी साझा करने में विफल रहा।

  2. चीन का प्रभाव: ट्रंप प्रशासन के अनुसार, WHO स्वतंत्र संस्था के बजाय कुछ देशों के राजनीतिक दबाव में कार्य कर रहा है।

  3. सुधारों की कमी: बार-बार चेतावनी के बावजूद संस्था ने अपनी जवाबदेही और प्रशासनिक ढांचे में बदलाव नहीं किए।

  4. अनुचित वित्तीय भार: अमेरिका का तर्क है कि वह सबसे बड़ा योगदानकर्ता (करीब 18%) होने के बावजूद उपेक्षित महसूस कर रहा था।

  5. संप्रभुता की रक्षा: नए प्रशासन ने इसे “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए उठाया गया कदम बताया है।

💰 बकाया राशि का विवाद

अमेरिका के बाहर निकलने के बावजूद वित्तीय विवाद बना हुआ है:

  • $260 मिलियन का बकाया: WHO के नियमों और अमेरिकी कानून के अनुसार, हटने से पहले बकाया राशि चुकाना अनिवार्य है। हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग ने इसे देने से इनकार करते हुए कहा है कि “अमेरिकी करदाताओं ने पहले ही बहुत भुगतान कर दिया है।”

🌎 वैश्विक स्वास्थ्य पर प्रभाव

विशेषज्ञों ने इस कदम को “वैज्ञानिक रूप से लापरवाह” बताया है। अमेरिका के हटने से:

  • WHO के बजट में करीब 20% की कमी आएगी, जिससे पोलियो उन्मूलन और भविष्य की महामारियों से लड़ने के कार्यक्रम प्रभावित होंगे।

  • अमेरिका अब रोग निगरानी (Disease Surveillance) के लिए अन्य देशों के साथ सीधे द्विपक्षीय (Bilateral) समझौते करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *