शामली पुलिस एक्शन: आयुष मलिक मतांतरण केस में फर्जी एआई (AI) वीडियो प्रसारित करने पर मुकदमा दर्ज

शामली | रविवार, 21 जून 2026

उत्तर प्रदेश के शामली जिले में पिछले कुछ समय से गरमाया हुआ आयुष मलिक मतांतरण (धर्म परिवर्तन) प्रकरण एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला केवल जमीनी विवाद या धर्म परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि इंटरनेट मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के खतरनाक गठजोड़ से जुड़ा है। शामली पुलिस ने आयुष मलिक के चेहरे का उपयोग कर बनाए गए एक फर्जी और सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील एआई वीडियो को इंटरनेट पर प्रसारित करने के आरोप में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के कार्यकर्ता के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है।

पुलिस इस घटना को शहर का सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की एक सोची-समझी डिजिटल साजिश मान रही है और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है।

एआई वीडियो की आड़ में माहौल खराब करने की कोशिश

यह पूरा मामला तब सामने आया जब शामली के मुहल्ला दयानंद नगर निवासी स्थानीय सभासद अनिल कुमार उपाध्याय ने कोतवाली में एक लिखित तहरीर दी। तहरीर के अनुसार, फेसबुक पर ‘आसिफ खान’ नाम के एक यूजर (जो कथित तौर पर राजनीतिक संगठन SDPI से जुड़ा हुआ है) ने आयुष मलिक की तस्वीरों का दुरुपयोग करके एक फर्जी और भ्रामक डीपफेक वीडियो तैयार किया।

इस वीडियो में तकनीक के जरिए आयुष मलिक के चेहरे और आवाज को इस तरह बदला गया, जिससे वह यह बोलता हुआ दिखाई दे रहा था कि सोशल मीडिया पर उसकी जो बिना दाढ़ी वाली (क्लीन शेव) तस्वीरें वायरल हो रही हैं, वे एआई से बनाई गई हैं। वीडियो में आगे डिजिटल हेरफेर के जरिए आयुष से यह कहलवाया गया:

“इस्लाम मेरे दिल में बसा है और मैं किसी के भी दबाव में आकर इसे नहीं छोड़ूंगा, चाहे मेरी जान ही क्यों न चली जाए।”

शिकायतकर्ता का आरोप है कि मतांतरण प्रकरण की आड़ में क्षेत्र का माहौल खराब करने और लोगों को भड़काने के उद्देश्य से ऐसे चार अलग-अलग वीडियो फेसबुक पर प्रसारित किए गए हैं।

पुलिस की कार्रवाई और SDPI की भूमिका पर जांच

शामली कोतवाली के थाना प्रभारी सचिन शर्मा ने बताया कि सभासद की तहरीर के आधार पर आरोपी आसिफ खान के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और शांति भंग करने की साजिश रचने से संबंधित सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

थाना प्रभारी ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर इस तरह के संवेदनशील और जाली वीडियो प्रसारित करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इसके अलावा, पुलिस इस बात की भी गहनता से जांच कर रही है कि इस पूरे मतांतरण विवाद में और सोशल मीडिया प्रोपेगैंडा चलाने में राजनीतिक दल एसडीपीआई (SDPI) की क्या भूमिका है।

क्या है मूल ‘शामली आयुष मलिक मतांतरण विवाद’? (Background Story)

इस मामले की गंभीरता को समझने के लिए इसके मुख्य घटनाक्रम को जानना जरूरी है। मूल रूप से शामली के काजीवाड़ा निवासी दवा व्यवसायी देवराज मलिक के 27 वर्षीय बेटे आयुष मलिक ने कथित तौर पर इस्लाम धर्म अपनाकर अपना नाम ‘मोहम्मद अली’ या ‘रहमान’ रख लिया था और चांदनी कुरैशी नाम की महिला से निकाह कर लिया था।

इस मामले में दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं, जिनकी जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है:

  • परिवार का आरोप (साजिश और संपत्ति विवाद): आयुष के पिता देवराज मलिक ने पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई थी कि उनके बेटे को जाल में फंसाकर जबरन या मनोवैज्ञानिक दबाव में धर्मांतरण कराया गया है। पिता का आरोप है कि यह उनके परिवार की करोड़ों रुपये की संपत्ति को हड़पने की एक सोची-समझी साजिश है। इस मामले में पुलिस ने चांदनी कुरैशी, उसके पिता इस्लाम कुरैशी और फुफेरे भाई तौफीक उर्फ भोला सहित कई आरोपियों को पूर्व में ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

  • युवक का बयान: इसके विपरीत, आयुष मलिक ने मीडिया के सामने आकर बयान दिया था कि उसने किसी दबाव में नहीं, बल्कि स्वेच्छा से इस्लाम का अध्ययन कर इसे अपनाया है।

इस विवाद के बीच लगातार सोशल मीडिया पर अफवाहों का दौर जारी है। इससे पहले ‘शबीना खान’ नामक एक युवती ने भी खुद को आयुष की बहन बताकर भ्रामक वीडियो जारी किया था, जिस पर बाद में पुलिसिया कार्रवाई के डर से उसने माफी मांगी थी।

डिजिटल युग की नई चुनौती: एआई और डीपफेक का बढ़ता खतरा

यह घटना इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि कैसे आज के दौर में जेनरेटिव एआई (Generative AI) और डीपफेक (Deepfake) तकनीक सामाजिक शांति के लिए एक बड़ा खतरा बन गई हैं। किसी भी व्यक्ति का चेहरा और आवाज हूबहू कॉपी करके संवेदनशील बयान दिलवाना अब बेहद आसान हो गया है, जिसका शरारती तत्व दंगों या सामाजिक तनाव को हवा देने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।

एआई जनित फर्जी खबरों से कैसे बचें?

  1. वायरल वीडियो पर तुरंत भरोसा न करें: किसी भी संवेदनशील मुद्दे पर वीडियो देखने के बाद सीधे निष्कर्ष पर न पहुंचें।

  2. आधिकारिक और प्रामाणिक स्रोतों की पुष्टि करें: मुख्यधारा की मीडिया या पुलिस प्रशासन के आधिकारिक बयानों पर ही भरोसा करें।

  3. तकनीकी विसंगतियों को पहचानें: डीपफेक वीडियो में अक्सर पलकों का न झपकना, होठों की अजीब मूवमेंट और चेहरे के किनारों पर पिक्सेलेशन (धुंधलापन) साफ दिखाई देता है।

शामली पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट को बिना पुष्टि किए आगे फॉरवर्ड न करें, अन्यथा उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

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