“यदि ईरान पसंद है तो वहीं चले जाएं”: जनरल आसिम मुनीर के बयान से पाकिस्तान में मचा बवाल

Saransh Kanaujia
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इस्लामाबाद. पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व और अल्पसंख्यक शिया समुदाय के बीच तनाव अब चरम पर पहुँच गया है। पाकिस्तानी सेना के प्रमुख (CDF) फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के एक ताजा बयान ने देश के भीतर सांप्रदायिक आग भड़का दी है। रावलपिंडी में आयोजित एक इफ्तार बैठक, जो सद्भाव के लिए बुलाई गई थी, अब नफरत और विवाद का केंद्र बन गई है।

क्या है ताजा विवाद?

खबरों के मुताबिक, 19 मार्च 2026 को वरिष्ठ शिया विद्वानों के साथ एक बंद कमरे में बैठक के दौरान जनरल मुनीर ने बेहद सख्त लहजा अख्तियार किया। जब कुछ विद्वानों ने ईरान और पाकिस्तान के संबंधों या हालिया क्षेत्रीय तनाव (अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान) पर चिंता व्यक्त की, तो जनरल मुनीर भड़क गए।

प्रत्यक्षदर्शियों और धार्मिक नेताओं के अनुसार, जनरल मुनीर ने सीधे तौर पर कहा:

“यदि आप लोगों को ईरान से इतना ही लगाव है, तो पाकिस्तान छोड़कर वहीं चले जाएं। पाकिस्तान में रहकर किसी दूसरे देश के प्रति वफादारी और अस्थिरता फैलाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

शिया समुदाय में भारी आक्रोश: ‘ज़िया-उल-हक के दौर की याद आई’

इस बयान के बाद पाकिस्तान के प्रमुख शहरों—कराची, लाहौर और गिलगित-बाल्टिस्तान में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।

  • सैयद जवाद नक़वी का पलटवार: प्रसिद्ध शिया विद्वान सैयद जवाद नक़वी ने जुमे के खुतबे (शुक्रवार के भाषण) में जनरल मुनीर की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे ‘शिया-विरोधी एजेंडा’ बताया और इसकी तुलना 1980 के दशक के तानाशाह जनरल ज़िया-उल-हक के दमनकारी दौर से की।

  • अपमान का आरोप: बैठक में शामिल विद्वानों का कहना है कि उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया गया और सेना प्रमुख ने “एकतरफा लेक्चर” देने के बाद इफ्तार से पहले ही बैठक छोड़ दी, जिसे धार्मिक अपमान माना जा रहा है।

क्यों संवेदनशील है यह समय? (Geopolitical Context)

यह विवाद ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं। हाल ही में ईरान के सर्वोच्च नेता के निधन और इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते सीधे टकराव ने पाकिस्तान के शिया समुदाय में गहरी चिंता पैदा की है।

  • ईरान-पाक तनाव: पाकिस्तान की सेना वर्तमान में ईरान के साथ अपनी सीमा पर कड़ा रुख अपनाए हुए है।

  • विदेशी दबाव: विशेषज्ञों का मानना है कि जनरल मुनीर सऊदी अरब और अमेरिका के साथ संबंधों को संतुलित करने के लिए ईरान समर्थित आवाजों को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।

विश्लेषण: क्या बढ़ेगा आंतरिक संकट?

जनरल आसिम मुनीर के लिए यह दोहरी चुनौती है। एक तरफ इमरान खान के समर्थकों (PTI) का राजनीतिक दबाव है, तो दूसरी तरफ अब एक बड़े धार्मिक अल्पसंख्यक वर्ग ने सेना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यदि यह विरोध प्रदर्शन उग्र होते हैं, तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा दोनों के लिए घातक साबित हो सकते हैं।

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