ट्रंप का 15% ग्लोबल टैरिफ: भारतीय निर्यातकों के लिए राहत या बड़ी आफत? जानें पूरा विश्लेषण

Saransh Kanaujia
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वॉशिंगटन. अमेरिकी व्यापार नीति में आज एक और नाटकीय मोड़ आया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ (Reciprocal Tariff) को अवैध घोषित करने वाले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के ठीक एक दिन बाद, पूरे विश्व के लिए 15% ‘ग्लोबल टैरिफ’ की घोषणा कर दी है। भारत के लिए यह खबर मिली-जुली प्रतिक्रिया लेकर आई है, क्योंकि यह नई दर हालिया द्विपक्षीय समझौते की दरों से तकनीकी रूप से कम है।

भारत पर क्या होगा असर?

  1. टैरिफ में मामूली कमी: अगस्त 2025 में रूसी तेल खरीद दंड और रेसिप्रोकल टैरिफ के कारण भारत पर कुल शुल्क 50% तक पहुँच गया था। फरवरी 2026 की शुरुआत में हुए एक समझौते के तहत इसे घटाकर 18% किया गया था। अब 15% की नई वैश्विक दर लागू होने से भारतीय निर्यातकों को 3% की अतिरिक्त राहत मिलेगी।

  2. श्रम-प्रधान क्षेत्रों को संजीवनी: टेक्सटाइल (कपड़ा), रत्न और आभूषण जैसे क्षेत्रों के लिए यह 15% की दर एक बड़ी राहत मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी, जो पहले 50% शुल्क के कारण लगभग खत्म हो गई थी।

  3. फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स पर संकट: भारतीय जेनेरिक दवाओं पर 15% शुल्क लगने से अमेरिका में दवाओं की कीमतें 10-14% तक बढ़ सकती हैं। हालांकि, वाइट हाउस ने संकेत दिए हैं कि आवश्यक दवाओं और कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स को इन शुल्कों से छूट दी जा सकती है।

  4. स्टील और एल्युमीनियम पर कोई राहत नहीं: भारतीय स्टील और एल्युमीनियम निर्यातकों के लिए बुरी खबर है। ‘सेक्शन 232’ के तहत लगा 50% का सुरक्षा शुल्क अभी भी बरकरार है, जिसे सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कोई सुरक्षा नहीं मिली है।

व्यापार समझौते की शर्तें और जोखिम

राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि भारत के साथ हुआ “ऐतिहासिक ट्रेड डील” जारी रहेगा। हालांकि, इस डील के बदले भारत को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है:

  • $500 बिलियन के अमेरिकी उत्पादों की खरीद की प्रतिबद्धता।

  • रूसी तेल का आयात पूरी तरह बंद करना।

  • अमेरिकी वस्तुओं पर भारत में जीरो टैरिफ लागू करना।

विशेषज्ञों की राय

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, यदि व्यापारिक अनिश्चितता का यह माहौल बना रहता है, तो वर्ष 2026 में भारत का अमेरिका को होने वाला निर्यात $86.5 बिलियन से घटकर $50 बिलियन तक गिर सकता है।

भारत का वाणिज्य मंत्रालय फिलहाल इस आदेश के कानूनी पहलुओं का अध्ययन कर रहा है। सरकार जल्द ही निर्यातकों के लिए एक नई एडवाइजरी जारी कर सकती है।

व्यापार और अर्थव्यवस्था: new.matribhumisamachar.com/business

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