नई दिल्ली । शनिवार, 20 जून 2026
अपनी फिल्मों में हमेशा रूढ़ियों को तोड़ते मजबूत और आत्मनिर्भर महिला किरदारों को दिखाने वाले मशहूर फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली (Imtiaz Ali) इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ (Main Vaapas Aaunga) को लेकर लगातार चर्चा में बने हुए हैं। लेकिन इसी बीच, एक हालिया इंटरव्यू में महिलाओं के बुर्का (Burqa) और पर्दा करने की प्रथा पर उनके एक बयान ने सोशल मीडिया पर एक नई तीखी बहस को जन्म दे दिया है।
यूट्यूबर समदीश भाटिया के शो ‘अनफिल्टर्ड बाय समदीश’ (Unfiltered by Samdish) में बात करते हुए इम्तियाज अली ने सामाजिक पाबंदियों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर खुलकर अपनी राय रखी।
क्या है इम्तियाज अली का पूरा बयान?
इंटरव्यू के दौरान जब सामाजिक रिवाजों और महिलाओं की पसंद पर बात हो रही थी, तब इम्तियाज अली ने कहा कि उन्हें यह तर्क बिल्कुल समझ नहीं आता जब कोई कहता है कि वह बुर्के या पर्दे में पूरी तरह सहज है।
डायरेक्टर ने कहा:
“मुझे ना ये बड़ा नापसंद है कि मैं बुर्के में कंफर्टेबल हूं, मैं पर्दे में कंफर्टेबल हूं। यह एक गिरे हुए समाज (Degenerated Society) की निशानी है, अगर आप ऐसा महसूस करते हैं। यह ठीक नहीं है। इसका मतलब है कि आपके दिमाग में आपका विक्टिमाइजेशन (Victimization) इतना हो गया है कि… पता नहीं कैसे।”
इम्तियाज अली का मानना है कि महिलाओं को ऐसी सामाजिक प्रथाओं पर सवाल उठाने चाहिए जो उनकी आज़ादी को सीमित करती हैं, न कि उन्हें अपनी सहजता मानकर स्वीकार कर लेना चाहिए।
“मैं किसी को टोकने वाला कौन?” – चरमपंथ पर जताई चिंता
सोशल मीडिया पर इस बयान के वायरल होने के बाद जहां कुछ लोग इसे महिला सशक्तिकरण और व्यक्तिगत आज़ादी के पक्ष में देख रहे हैं, वहीं कुछ यूजर्स इस पर आपत्ति भी जता रहे हैं। हालांकि, इंटरव्यू में इम्तियाज अली ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे किसी खास समुदाय या व्यक्ति को निशाना नहीं बना रहे हैं।
बातचीत को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने समाज में कम होती सहनशीलता पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा:
“मैं किसी को टोक नहीं रहा। मैं कौन होता हूं किसी को टोकने या उस पर सवाल उठाने वाला? मैं बस सहनशीलता और संयम की बात कर रहा हूं, वो होना चाहिए। मेरा हालिया सोचना यह है कि संयम रखने वाले लोग (Moderates) कहां चले गए? आजकल हर कोई चरमपंथी (Extreme) हो गया है। बातचीत करना मुश्किल हो गया है।”
उन्होंने मजाकिया लहजे में यह भी जोड़ा कि वैचारिक मतभेद होने के बावजूद वे दूसरों के साथ मिल-जुलकर रहने में विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा, “मैं आपका दुश्मन नहीं हूं। मैं अब भी आपकी निहारी का मज़ा लूंगा।”
फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ (2026): तथ्यों में सुधार और पूरी जानकारी
इम्तियाज अली इस समय अपनी फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ (Main Vaapas Aaunga) की रिलीज को लेकर भी सुर्खियों में हैं, जो इसी महीने 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है।
फिल्म से जुड़े महत्वपूर्ण और सही तथ्य:
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मुख्य कलाकार और संगीत: इस फिल्म में वयोवृद्ध अभिनेता नसीरुद्दीन शाह (Naseeruddin Shah) मुख्य भूमिका में हैं। उनके साथ दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh), वेदांग रैना (Vedang Raina) और शरवरी वाघ (Sharvari Wagh) मुख्य किरदारों में नजर आ रहे हैं। फिल्म का संगीत एक बार फिर प्रतिष्ठित तिकड़ी—ए.आर. रहमान, इरशाद कामिल और इम्तियाज अली द्वारा तैयार किया गया है।
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सच्ची कहानी की पृष्ठभूमि: यह फिल्म 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन (Partition) के समय के अधूरे रह गए एक खूबसूरत प्रेम संबंध की दास्तां है।
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किरदारों का सही विवरण: फिल्म में नसीरुद्दीन शाह ने बुजुर्ग ‘ईशर सिंह ग्रेवाल’ (जिन्हें प्यार से कीनू भी कहा जाता है) की भूमिका निभाई है, जो अपनी अंतिम घड़ियों में डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) से जूझ रहे हैं। उनके युवा दिनों का किरदार वेदांग रैना ने निभाया है, जिसे अविभाजित पंजाब (अब पाकिस्तान के सरगोधा) में ‘जिया’ (शरवरी वाघ) से गहरा प्यार हो जाता है।
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दिलजीत दोसांझ की भूमिका: कई जगह शुरुआती रिपोर्ट्स में दिलजीत को मुख्य बुजुर्ग किरदार बताया गया था, जो कि गलत है। फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने बुजुर्ग ईशर के पोते ‘निर्वैर’ की भूमिका निभाई है, जो वर्तमान समय में लंदन में रहता है और अपने दादा की आखिरी इच्छा (अपने पुश्तैनी घर सरगोधा लौटने की) को पूरा करने के लिए उनके अतीत की परतों को टटोलता है।
यह फिल्म राष्ट्रवाद की आक्रामक बहस से दूर विभाजन की त्रासदी को इंसानी दिल और भावनाओं के नजरिए से बयां करती है। जहां एक तरफ फिल्म बॉक्स ऑफिस पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं बटोर रही है, वहीं दूसरी तरफ इम्तियाज अली के इस हालिया बयान ने उन्हें सिनेमा के साथ-साथ सामाजिक विमर्श के केंद्र में भी ला खड़ा किया है।
