उत्तराखंड में शिक्षा क्रांति: 2026 से मदरसों में खत्म होगा पुराना सिस्टम, अब ‘स्टेट बोर्ड’ सिलेबस अनिवार्य; सीएम धामी का बड़ा फैसला

हरिद्वार | रविवार, 19 अप्रैल 2026

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में एक युगांतरकारी परिवर्तन की घोषणा की है। हरिद्वार के अखंड परमधाम आश्रम में आयोजित एक समारोह के दौरान सीएम ने स्पष्ट किया कि राज्य में वर्षों से संचालित मदरसा बोर्ड को अब भंग कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि 1 जुलाई 2026 से प्रदेश के सभी मदरसों में उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद (UBSE) द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जो भी मदरसा इस आदेश का उल्लंघन करेगा या राज्य शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम लागू नहीं करेगा, उसे तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ छात्रों को विज्ञान, गणित और आधुनिक विषयों से जोड़कर उन्हें समान अवसर प्रदान करना है।

‘अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ का गठन

पुरानी व्यवस्था को बदलते हुए सरकार ने ‘उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ (Uttarakhand Minority Education Authority) का गठन किया है। अब प्रदेश के सभी मदरसों और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को इस नए प्राधिकरण के तहत नई मान्यता लेनी होगी। प्राधिकरण का मुख्य कार्य शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और पारदर्शिता बनाए रखना होगा।

चारधाम यात्रा 2026: आज से शुरू हुआ पवित्र सफर

शिक्षा सुधारों के साथ ही मुख्यमंत्री ने प्रदेश की आध्यात्मिक यात्रा पर भी अपडेट दिया। आज (19 अप्रैल 2026) अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल गए हैं।

  • केदारनाथ धाम: कपाट 22 अप्रैल को खुलेंगे।

  • बद्रीनाथ धाम: कपाट 24 अप्रैल को खुलेंगे।

मुख्यमंत्री ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम यात्रा के लिए प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। उन्होंने ‘नमामि गंगे’ परियोजना के तहत हरिद्वार में एक नए घाट का शिलान्यास भी किया, जो भविष्य में कुंभ और अन्य स्नान पर्वों पर भीड़ नियंत्रण में सहायक होगा।


राजनीति और नारी शक्ति पर प्रहार

हरिद्वार में युगपुरुष स्वामी परमानंद गिरी के 71वें संन्यास जयंती महोत्सव में शामिल हुए सीएम धामी ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण बिल) का जिक्र करते हुए कहा कि जो लोग इस ऐतिहासिक सुधार का विरोध कर रहे हैं, वे असल में महिलाओं के सशक्तिकरण और उनके अधिकारों के विरोधी हैं।

संत समाज का समर्थन

सरकार के इस फैसले का उत्तराखंड के प्रमुख संतों और आध्यात्मिक गुरुओं ने स्वागत किया है। योग गुरु बाबा रामदेव और स्वामी चिदानंद सरस्वती की उपस्थिति में संत समाज ने कहा कि शिक्षा में एकरूपता लाने से देवभूमि का भविष्य उज्जवल होगा।

मुख्य बिंदु:

  • मदरसा बोर्ड पूरी तरह भंग; ‘उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ संभालेगा कमान।

  • जुलाई 2026 से सभी मदरसों में अनिवार्य होगा उत्तराखंड स्टेट बोर्ड (UBSE) का पाठ्यक्रम।

  • नियम न मानने वाले मदरसों पर लगेगा ताला, नई मान्यता लेना हुआ जरूरी।

  • गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलने के साथ चारधाम यात्रा 2026 का विधिवत आगाज़।

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