बिजनौर: ‘निकाह’ से प्रेमी का इनकार, युवती ने घर के बाहर खाया जहर; इलाके में सनसनी

Saransh Kanaujia
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लखनऊ | रविवार, 19 अप्रैल 2026

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। नूरपुर थाना क्षेत्र के राजा का ताजपुर कस्बे में एक 18 वर्षीय युवती ने अपने प्रेमी के घर के बाहर कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या का प्रयास किया। यह घटना प्रेम प्रसंग में आए विवाद और शादी के वादे से मुकरने के बाद हुई है। वर्तमान में युवती की हालत नाजुक बनी हुई है और उसे इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, युवती का कस्बे के ही एक युवक के साथ पिछले एक साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों एक ही संस्थान में साथ पढ़ाई करते थे और भविष्य में विवाह करना चाहते थे। हालांकि, इस रिश्ते को लेकर युवती के परिवार में गहरा विरोध था, जिसके कारण घर में लंबे समय से तनावपूर्ण माहौल बना हुआ था।

निकाह की जिद और प्रेमी का पलायन

घटनाक्रम के मुताबिक, शुक्रवार को युवती अपनी माँ के साथ सीधे युवक के घर पहुँची और उस पर निकाह का दबाव बनाया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार:

  • युवती ने युवक से तुरंत शादी करने की बात कही।

  • युवक ने फिलहाल शादी की जिम्मेदारी उठाने से इनकार कर दिया।

  • विवाद बढ़ता देख युवक अपने घर पर ताला लगाकर वहां से फरार हो गया।

जब युवती ने देखा कि युवक घर छोड़कर चला गया है और दरवाजों पर ताले लटके हैं, तो वह गहरे सदमे और भावुक आवेश में आ गई। इसी दौरान उसने प्रेमी के दरवाजे पर ही जहरीला पदार्थ निगल लिया।

इलाके में हड़कंप, पुलिस कर रही जांच

युवती को बेसुध हालत में देख स्थानीय लोगों और परिजनों में हड़कंप मच गया। उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बड़े अस्पताल (हायर सेंटर) रेफर कर दिया।

पुलिस का बयान:

नूरपुर थाना पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक:

“अभी तक इस मामले में किसी भी पक्ष की ओर से कोई लिखित तहरीर (शिकायत) नहीं मिली है। शिकायत मिलने के बाद कानूनी नियमों के तहत निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस युवक और उसके परिवार की गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है।”

विशेषज्ञों की राय और सामाजिक चिंता

बिजनौर में बढ़ती इस तरह की घटनाएं युवाओं में मानसिक दबाव और संवाद की कमी को दर्शाती हैं। मनोचिकित्सकों का मानना है कि आवेश में लिए गए ऐसे फैसले न केवल जीवन को खतरे में डालते हैं, बल्कि परिवारों को भी गहरे संकट में धकेल देते हैं।

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