लूसी लेटबी: अस्पताल के ‘डेथ जोन’ और मासूमों के कत्ल की वो खौफनाक कहानी जो हकीकत है

मुंबई. ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म पर इन दिनों एक ऐसी डॉक्यूमेंट्री की चर्चा है जिसने दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए हैं। नेटफ्लिक्स पर हाल ही में रिलीज हुई ‘द इन्वेस्टिगेशन ऑफ लूसी लेटबी’ (The Investigation of Lucy Letby) एक ऐसी नर्स की कहानी बयां करती है, जिसे ब्रिटेन के इतिहास की सबसे खतरनाक महिला सीरियल किलर माना गया है। यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लगती है, लेकिन इसकी सबसे डरावनी सच्चाई यह है कि इसमें दिखाया गया हर मंजर हकीकत है।

अस्पताल बना ‘डेथ जोन’: 25 साल की नर्स और मासूमों का कत्ल

यह कहानी साल 2015 में इंग्लैंड के ‘काउंटिस ऑफ चेस्टर हॉस्पिटल’ से शुरू होती है। यहाँ नियोनेटल यूनिट (नवजात शिशु वार्ड) में लूसी लेटबी नाम की एक 25 वर्षीय नर्स की तैनाती होती है। जून 2015 के बाद से अस्पताल में अचानक नवजात बच्चों की मौतों का सिलसिला शुरू हो गया। बच्चे बिना किसी ठोस मेडिकल वजह के दम तोड़ रहे थे, जिससे डॉक्टर और प्रशासन हैरान थे।

जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

जब मौतों का आंकड़ा 13 के पार पहुंच गया, तब गहराई से जांच शुरू हुई। जांचकर्ताओं ने पाया कि जब-जब लूसी की ड्यूटी (नाइट शिफ्ट) होती थी, तभी बच्चों की तबीयत बिगड़ती थी। शक के आधार पर जब उसे डे-शिफ्ट में भेजा गया, तो बच्चों की मौत की दर अचानक गिर गई। 2018 में पहली बार गिरफ्तारी के बाद लूसी के घर की तलाशी में पुलिस को जो मिला, उसने सबको सुन्न कर दिया।

“मैं बहुत बुरी हूँ, मैंने ही यह किया है।” > लूसी के घर से मिली एक पर्ची पर ये शब्द लिखे थे। इसके अलावा अस्पताल के 250 से ज्यादा गोपनीय दस्तावेज भी उसके पास से बरामद हुए।

हत्या के ऐसे तरीके जो पोस्टमॉर्टम में न पकड़े जाएं

डॉक्यूमेंट्री में खुलासा किया गया है कि लूसी बच्चों को मारने के लिए बेहद शातिराना तरीके अपनाती थी:

  • एयर एम्बोलिज्म: नसों या फीडिंग ट्यूब में हवा के इंजेक्शन लगा देना।

  • ओवरफीडिंग: बच्चों को जरूरत से ज्यादा दूध पिलाकर उनका दम घोंटना।

  • इंसुलिन पॉइजनिंग: शरीर में जहर की तरह इंसुलिन का इस्तेमाल करना।

कोर्ट का फैसला और आलोचना

अगस्त 2023 में कोर्ट ने लूसी लेटबी को 7 नवजात शिशुओं की हत्या और कई अन्य को मारने की कोशिश का दोषी पाया और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। हालांकि, यह डॉक्यूमेंट्री ब्रिटिश हेल्थ सिस्टम पर भी सवाल उठाती है कि आखिर क्यों अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टरों की शुरुआती चेतावनियों को नजरअंदाज किया।

सोशल मीडिया पर इस डॉक्यूमेंट्री को लेकर बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसे अस्पताल की लापरवाही और ‘सिस्टम फेलियर’ बता रहे हैं, तो कुछ इसे एक विक्षिप्त अपराधी की सनक।

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