CBSE New Three Language Policy: तीन-भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार, 14 जुलाई को अगली सुनवाई

नई दिल्ली शुक्रवार, 19 जून 2026

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा कक्षा 9वीं और 10वीं के लिए अनिवार्य की जा रही नई तीन-भाषा नीति (Three-Language Policy) को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में याचिकाकर्ताओं को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। देश की शीर्ष अदालत (Supreme Court) ने उस याचिका पर कोई भी अंतरिम आदेश (Stay Order) जारी करने से साफ इनकार कर दिया है, जिसमें इस सत्र से तीन भाषाएं पढ़ाना अनिवार्य करने वाले CBSE के सर्कुलर को चुनौती दी गई थी।

इस फैसले के बाद अब यह साफ हो गया है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए CBSE अपनी इस नई व्यवस्था को तय समय सीमा के भीतर लागू करने की तैयारियां जारी रखेगा। इस मामले पर अब अगली विस्तृत सुनवाई 14 जुलाई, 2026 को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों नहीं दी अंतरिम राहत?

मुख्य न्यायाधीश (CJI) और न्यायमूर्ति की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि इस विषय पर पहले ही विस्तार से बहस हो चुकी है और इसके कई पहलुओं पर विचार किया जाना बाकी है। अदालत ने कहा कि चूंकि मामला बेहद संवेदनशील है और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा है, इसलिए बिना पूरी रिपोर्ट देखे इस स्तर पर कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया जा सकता।

शीर्ष अदालत ने इस नई याचिका को पहले से ही लंबित इसी तरह की अन्य समान याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है और केंद्र सरकार, NCERT तथा CBSE से उनकी तैयारियों पर व्यापक रिपोर्ट मांगी है।

क्या है विवाद और किसने दायर की याचिका?

यह याचिका ‘फ्रेंड्स ऑफ पीपल फॉर एक्टिव डेमोक्रेसी’ और कुछ अन्य छात्र-अभिभावक संगठनों द्वारा दाखिल की गई है। अदालत में याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने स्पष्ट किया कि वे बुनियादी तौर पर तीन-भाषा नीति (Three-Language Formula) का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि बोर्ड द्वारा इसे अचानक और जिस तरीके से लागू किया जा रहा है, उस प्रक्रिया को चुनौती दे रहे हैं।

याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्तियां:

  1. अचानक बदलाव: शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरू होने के बाद मई के मध्य में सर्कुलर जारी कर इसे 1 जुलाई 2026 से लागू करने का निर्देश दिया गया, जिससे स्कूलों और छात्रों को संभलने का मौका नहीं मिला।

  2. संसाधनों की कमी: कक्षा 9 के स्तर के लिए नई R3 (तीसरी भाषा) की किताबें उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण CBSE ने कक्षा 6 की किताबों से पढ़ाने को कहा है।

  3. शिक्षकों का टोटा: स्कूलों के पास अचानक क्षेत्रीय या स्थानीय भाषाएं पढ़ाने के लिए पर्याप्त योग्य शिक्षक नहीं हैं।

CBSE की नई नीति के मुख्य नियम (जो आपको जानना जरूरी है)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE 2023) के तहत लाए गए इस बदलाव के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य: छात्र कुल 3 भाषाएं (R1, R2, और R3) पढ़ेंगे, जिनमें से कम से कम 2 भाषाएं मूल भारतीय (Native Indian Languages) होनी अनिवार्य हैं।

  • विदेशी भाषाओं पर नियम: विदेशी भाषा (जैसे फ्रेंच, जर्मन) को केवल तीसरी भाषा (R3) के रूप में तभी चुना जा सकता है जब शुरुआती दोनों भाषाएं भारतीय हों। अन्यथा इसे चौथी अतिरिक्त भाषा के रूप में ही पढ़ा जा सकेगा।

  • बोर्ड परीक्षा का दबाव नहीं: छात्रों के मानसिक तनाव को कम करने के लिए कक्षा 10वीं में तीसरी भाषा (R3) की कोई मुख्य बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसका मूल्यांकन पूरी तरह से स्कूल-स्तरीय (Internal Assessment) होगा, हालांकि इसके अंक फाइनल सर्टिफिकेट में दर्ज किए जाएंगे।

संसाधनों की कमी पर CBSE का अंतरिम उपाय:

जिन स्कूलों में योग्य भाषा शिक्षक नहीं हैं, वे अस्थाई रूप से अन्य विषयों के उन शिक्षकों की मदद ले सकते हैं जिन्हें उस भाषा का व्यावहारिक ज्ञान (Functional Proficiency) हो। इसके साथ ही नए दिशा-निर्देशों के तहत 30 जून 2026 तक सभी स्कूलों को ‘OASIS’ पोर्टल पर अपनी भाषा संबंधी जानकारी अपडेट करनी है।

निष्कर्ष और आगे की राह

अदालत द्वारा अंतरिम रोक न लगाने के कारण तकनीकी रूप से यह नीति लागू होने की दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि, देश भर के शिक्षाविदों, शिक्षकों और अभिभावकों की नजरें अब 14 जुलाई को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। क्या कोर्ट इस नीति के लागू होने के तरीके में कोई बदलाव करेगा या बोर्ड को अतिरिक्त समय देगा, यह आने वाले वक्त में ही साफ हो पाएगा।

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