कानपुर: वर्दी की आड़ में नौकरी का ‘खेल’, फर्जी दरोगा गिरफ्तार; बर्खास्त साथी के साथ मिलकर रचते थे ठगी का जाल

कानपुर. नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले एक शातिर गिरोह का अनवरगंज पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने एक ऐसे जालसाज को गिरफ्तार किया है जो दरोगा की वर्दी पहनकर न केवल लोगों को ठगता था, बल्कि शक होने पर उन्हें खाकी का रौब दिखाकर धमकाता भी था।

चेकिंग के दौरान पकड़ा गया ‘फर्जी दरोगा’

डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि अनवरगंज पुलिस कालपी रोड स्थित कूड़ाघर के पास चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान पुलिस ने उन्नाव के दोस्ती नगर निवासी संजय कुमार सिंह को दरोगा की वर्दी में संदिग्ध अवस्था में गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि वह पुलिस विभाग का हिस्सा नहीं है, बल्कि वर्दी पहनकर ठगी की वारदातों को अंजाम देता है।

हाईटेक ठगी का तरीका: होटल में परीक्षा, स्कूल में इंटरव्यू

यह गिरोह किसी पेशेवर कंपनी की तरह काम करता था। गिरोह के सदस्य, जिसमें एक बर्खास्त पुलिसकर्मी दुर्गेश कुमार सविता और उसका साथी विजय सिंह चौहान शामिल हैं, लखनऊ में निजी स्कूल और होटल किराए पर लेते थे। वहां बाकायदा अभ्यर्थियों की परीक्षा और इंटरव्यू कराए जाते थे ताकि उन्हें असलियत का अहसास न हो। पैसे ऐंठने के बाद, रिजल्ट में देरी का बहाना बनाकर पीड़ितों को महीनों टरकाया जाता था।

बरामदगी ने उड़ाए होश

आरोपित के पास से जो सामग्री मिली है, उसने पुलिस को भी हैरान कर दिया:

  • नकली हथियार: असली जैसी दिखने वाली लाइटर पिस्टल।

  • फर्जी पहचान: पुलिस और CBI के फर्जी आईकार्ड।

  • वीआईपी कार: एक कार बरामद हुई है जिस पर आयकर विभाग के ‘संयुक्त आयुक्त’ (Joint Commissioner) की नंबर प्लेट लगी थी।

  • अन्य: दरोगा की वर्दी, दो मोबाइल फोन और कई अंगूठियां।

बर्खास्त सिपाही ही था मास्टरमाइंड

पुलिस के अनुसार, इस गैंग का अहम हिस्सा दुर्गेश कुमार सविता है, जो पहले पुलिस में था लेकिन अपनी काली करतूतों की वजह से बर्खास्त किया जा चुका है। बर्खास्त होने के बाद उसने सरकारी तंत्र की जानकारी का इस्तेमाल ठगी के लिए करना शुरू कर दिया।

पुलिस की कार्रवाई:

वर्तमान में संजय कुमार सिंह पुलिस की गिरफ्त में है, जबकि फरार आरोपितों (दुर्गेश और विजय) की तलाश में पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने युवाओं को अपनी ठगी का शिकार बनाया है।

सावधानी संदेश: पुलिस प्रशासन ने अपील की है कि किसी भी सरकारी नौकरी के झांसे में आकर किसी व्यक्ति को नकद धन न दें। भर्ती की प्रक्रिया केवल आधिकारिक बोर्ड और वेबसाइट के माध्यम से ही पूरी की जाती है।

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