पीलीभीत: 3 पत्नियां और 5 करोड़ का घोटाला! शिक्षा विभाग का ‘करोड़पति चपरासी’ गिरफ्तार, पत्नी को कागजों पर बना डाला था सरकारी टीचर

पीलीभीत। शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने शासन और प्रशासन की नींद उड़ा दी है। जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय में तैनात एक चपरासी ने तकनीकी सेंधमारी कर सरकारी खजाने में करोड़ों का डाका डाल दिया। आरोपी चपरासी इल्हाम-उर-रहमान शम्सी ने न केवल सरकारी फंड से 5 करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी की, बल्कि अपनी अय्याशी और रसूख के लिए तीन शादियां कीं और एक पत्नी को तो कागजों पर फर्जी शिक्षक बनाकर उसे वेतन भी जारी करता रहा।

तकनीकी सेंधमारी: 53 खाते और 98 फर्जी ट्रांजैक्शन

जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी शम्सी ने शिक्षा विभाग के सैलरी पोर्टल और ट्रेजरी सिस्टम की खामियों का फायदा उठाया। उसने सरकारी वेतन फंड से पैसे निकालने के लिए कुल 53 बैंक खातों का जाल बुना था।

  • फर्जी बेनिफिशियरी: उसने करीब 98 बार फर्जी ट्रांजैक्शन के जरिए सरकारी धन को अलग-अलग खातों में भेजा।

  • पत्नी को बनाया टीचर: उसने अपनी एक पत्नी, अरशी खातून के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसे सरकारी शिक्षिका के रूप में दर्ज कर दिया और उसके खाते में 1 करोड़ रुपये से अधिक की ‘सैलरी’ भेज दी।

3 पत्नियां और करोड़ों की संपत्तियां

पुलिस की पड़ताल में शम्सी की निजी जिंदगी के चौंकाने वाले राज खुले हैं। चपरासी होने के बावजूद वह राजाओं जैसी जिंदगी जी रहा था:

  1. पहली पत्नी (अरशी खातून): पीलीभीत में रहती है, जिसके खाते में 33.30 लाख रुपये की एफडी (FD) मिली।

  2. दूसरी पत्नी (अजरा): बुलंदशहर के खुर्जा में रहती है, जिसके नाम पर 25 लाख रुपये की एफडी कराई गई।

  3. तीसरी पत्नी (लुबना): संभल जिले में रहती है।

इसके अलावा, आरोपी ने अवैध कमाई से कई बेनामी संपत्तियां और महंगी गाड़ियां भी खरीदी थीं, जिन्हें अब पुलिस कुर्क करने की तैयारी कर रही है।

बैंक मैनेजर की सतर्कता से खुला राज

इस विशाल घोटाले का खुलासा तब हुआ जब बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजर को कुछ खातों में संदिग्ध ट्रांजैक्शन नजर आए। चपरासी की पत्नी के खाते में अचानक बड़ी रकम आने पर मैनेजर ने तत्काल जिलाधिकारी (DM) को सूचित किया। इसके बाद हुई ऑडिट जांच में करोड़ों के गबन की पुष्टि हुई।

विभागीय मिलीभगत के घेरे में बड़े अधिकारी

शम्सी ने पुलिस पूछताछ में अकेले इस कांड को अंजाम देने से इनकार किया है। उसने DIOS कार्यालय के दो क्लर्कों पर मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। बड़ा सवाल यह है कि एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पास डिजिटल सिग्नेचर या लॉगिन क्रेडेंशियल कैसे आए? क्या ट्रेजरी विभाग और DIOS कार्यालय के बड़े अधिकारियों की मिलीभगत के बिना 5 करोड़ रुपये का गबन संभव था?

अब तक की कार्रवाई:

  • गिरफ्तारी: आरोपी चपरासी शम्सी और उसकी पत्नी अरशी खातून को जेल भेज दिया गया है।

  • खाते फ्रीज: पुलिस ने 53 संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज कर उनमें मौजूद करोड़ों की राशि होल्ड कर दी है।

  • जांच: वर्तमान DIOS और ट्रेजरी के संदिग्ध कर्मचारियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है।

नोट: पुलिस का मानना है कि जांच का दायरा बढ़ने पर घोटाले की रकम 5 करोड़ से भी ऊपर जा सकती है। शासन ने इस मामले में कठोरतम कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

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