पाक-अफगान सीमा पर खूनी संघर्ष: एयरस्ट्राइक के बाद अब अंधाधुंध फायरिंग, 4 भाइयों की मौत से मचा कोहराम

Saransh Kanaujia
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इस्लामाबाद. पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमावर्ती इलाकों में तनाव अब चरम पर पहुँच गया है। पिछले 48 घंटों में हुई हिंसक घटनाओं और सैन्य कार्रवाइयों ने दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट और बढ़ा दी है। जहाँ एक ओर सीमा पार से हुई गोलीबारी में एक ही परिवार के चार चिराग बुझ गए, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक ने तालिबान प्रशासन की नींद उड़ा दी है।

बजौर में मातम: सीमा पार से आई गोलियों ने छीनी 4 भाइयों की जिंदगी

रविवार को खैबर पख्तूनख्वा के बजौर जिले में दिल दहला देने वाली घटना घटी। अफगान सीमा से सटे इस इलाके में अचानक हुई फायरिंग में एक ही परिवार के चार सगे भाइयों की मौत हो गई।

  • पीड़ित: मृतकों की उम्र महज 18 से 28 वर्ष के बीच थी।

  • स्थिति: पुलिस के मुताबिक हमला अफगानिस्तान की ओर से किया गया। इस घटना में एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल है, जिसका इलाज स्थानीय अस्पताल में चल रहा है।

  • असर: इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

पाकिस्तान की बड़ी सैन्य कार्रवाई: कंधार के पास एयरस्ट्राइक

बजौर की घटना से ठीक पहले, शनिवार और रविवार की दरम्यानी रात पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कंधार के नजदीकी इलाकों में हवाई हमले (Air Strikes) किए।

  • पाकिस्तान का दावा: इन हमलों का मकसद उन आतंकी ठिकानों को नष्ट करना था, जहाँ से पाकिस्तान के खिलाफ साजिशें रची जा रही थीं।

  • तालिबान का पलटवार: अफगान तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्ला मुजाहिद ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि हमलों में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। हालांकि, जमीन पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

आंकड़ों की जुबानी: 684 अफगान तालिबान ढेर

पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्ला तरार ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया है। उन्होंने बताया कि 26 फरवरी से जारी सैन्य ऑपरेशनों में अब तक:

  1. 684 अफगान तालिबान मारे जा चुके हैं।

  2. 912 आतंकी घायल हुए हैं।

तरार ने आरोप लगाया कि ये तत्व न केवल पाकिस्तान में अस्थिरता फैला रहे हैं, बल्कि प्रतिबंधित आतंकी संगठनों को शरण भी दे रहे हैं।

क्या युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं दोनों देश?

अमेरिकी पत्रिका ‘नेशनल इंटरेस्ट’ ने इस बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता जताई है। पत्रिका के अनुसार:

  • आर्थिक चोट: सीमा पर अस्थिरता के कारण क्षेत्रीय व्यापार और आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ गई हैं।

  • मानवीय संकट: डूरंड रेखा (Durand Line) के दोनों ओर रहने वाले आम नागरिक इस संघर्ष की सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं।

  • अस्थिरता: अगर कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।

विशेषज्ञों की राय: जानकारों का मानना है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को लेकर बढ़ता विवाद अब एक सीमित युद्ध (Limited War) जैसी स्थिति में बदलता जा रहा है।

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच यह ‘अघोषित युद्ध’ न केवल मासूमों की जान ले रहा है, बल्कि मध्य एशिया से जुड़ने वाले व्यापारिक सपनों को भी धुंधला कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों देश बातचीत की मेज पर लौटेंगे या गोलियों की गूँज और तेज होगी।

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