जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी का यासुकुनी श्राइन दौरा: द्वितीय विश्व युद्ध की 81वीं वर्षगांठ पर क्यों गहराया राजनयिक विवाद?

Saransh Kanaujia
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टोक्यो । शनिवार, 15 अगस्त 2026
15 अगस्त 2026 को द्वितीय विश्व युद्ध (WWII) में जापान के आत्मसमर्पण की 81वीं वर्षगांठ के अवसर पर, जापानी रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी (Shinjiro Koizumi) ने टोक्यो स्थित विवादित यासुकुनी श्राइन (Yasukuni Shrine) का दौरा कर युद्ध में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। रक्षा प्रमुख के रूप में उनकी इस यात्रा ने पूर्वी एशिया के क्षेत्रीय कूटनीतिक माहौल में एक बार फिर गर्माहट ला दी है।

क्या है यासुकुनी श्राइन विवाद और इसका ऐतिहासिक संदर्भ?

टोक्यो के चियोदा वार्ड में स्थित यासुकुनी श्राइन में 19वीं सदी के उत्तरार्ध से लेकर द्वितीय विश्व युद्ध तक जापान के युद्धों में शहीद हुए लगभग 25 लाख सैनिकों और नागरिकों को सम्मानित किया जाता है।
हालांकि, इस श्राइन को लेकर सबसे बड़ा विवाद 1978 में शुरू हुआ, जब इसमें द्वितीय विश्व युद्ध के 14 क्लास-ए (Class-A) दोषसिद्ध युद्ध अपराधियों को भी सम्मानित (Enshrine) सूची में शामिल किया गया।
  • चीन और दक्षिण कोरिया का रुख: दोनों पड़ोसी देशों ने WWII के दौरान जापानी सैन्य आक्रामकता का दंश झेला था। इन देशों का मानना है कि जापानी नेताओं द्वारा इस श्राइन का दौरा करना युद्धकालीन अत्याचारों के प्रति पश्चाताप की कमी और सैन्यवाद को बढ़ावा देने जैसा है।

रक्षा मंत्री कोइज़ुमी का दौरा और वैश्विक प्रतिक्रिया

जापान द्वारा अपनी सुरक्षा नीति को अधिक सक्रिय बनाने और रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के बीच रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी का यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है।
श्राइन दर्शन के बाद कोइज़ुमी ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि उनका दौरा शांति के प्रति जापान की प्रतिबद्धता को दोहराने और राष्ट्र के लिए प्राण न्योछावर करने वालों को श्रद्धांजलि देने के लिए था।
इसके बावजूद, चीन और दक्षिण कोरिया ने इस कदम की कड़ी आलोचना की:
  • चीन: चीनी विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा पर कड़ा विरोध (Strong Protest) दर्ज कराते हुए इसे ऐतिहासिक संवेदनाओं पर आघात बताया।
  • दक्षिण कोरिया: दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्रालय ने गहरा खेद (Deep Regret) व्यक्त किया और जापान से अपने इतिहास पर अधिक जिम्मेदारी और आत्मचिंतन दिखाने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची का कूटनीतिक संतुलन

दूसरी ओर, जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची (Sanae Takaichi) ने सीधे यासुकुनी श्राइन जाने के बजाय चिदोरीगाफुची राष्ट्रीय कब्रिस्तान (Chidorigafuchi National Cemetery) में श्रद्धांजलि अर्पित की।
  • राजनयिक विचार: पूर्व में यासुकुनी श्राइन जाने वाली ताकाइची ने इस बार व्यक्तिगत रूप से पूजा की भेंट (Ritual Offering) तो भेजी, लेकिन स्वयं जाने से परहेज किया।
  • उद्देश्य: इसे चीन और दक्षिण कोरिया के साथ पहले से तनावपूर्ण संबंधों को और बिगड़ने से रोकने के एक संतुलित कूटनीतिक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

प्रश्नोत्तरी (FAQ)

Q1: यासुकुनी श्राइन क्यों विवादित है?
Ans: इसमें द्वितीय विश्व युद्ध में मारे गए आम सैनिकों के साथ-साथ 14 सजायाफ्ता Class-A युद्ध अपराधियों को भी सम्मानित किया गया है, जिसके कारण चीन और दक्षिण कोरिया इसका विरोध करते हैं।
Q2: 15 अगस्त 2026 को जापान में क्या हुआ?
Ans: जापान ने द्वितीय विश्व युद्ध में आत्मसमर्पण की 81वीं वर्षगांठ मनाई, जिस अवसर पर रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी ने यासुकुनी श्राइन का दौरा किया।
Q3: चिदोरीगाफुची राष्ट्रीय कब्रिस्तान यासुकुनी से कैसे अलग है?
Ans: चिदोरीगाफुची कब्रिस्तान अज्ञात सैनिकों और नागरिकों को समर्पित एक गैर-धार्मिक राष्ट्रीय स्मारक है, जिसे लेकर कोई राजनयिक विवाद नहीं है।

 

अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख 15 अगस्त 2026 की घटनाओं और वैश्विक समाचार रिपोर्टों पर आधारित एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट है। इसका उद्देश्य किसी राजनीतिक या धार्मिक दृष्टिकोण का समर्थन करना नहीं, बल्कि निष्पक्ष जानकारी प्रदान करना है।

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