धार भोजशाला केस: हाईकोर्ट में टली सुनवाई, 18 फरवरी को पेश होगी 98 दिनों की ASI सर्वे रिपोर्ट

भोपाल. मध्य प्रदेश के बहुचर्चित धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मामले में आज होने वाली महत्वपूर्ण सुनवाई टल गई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में अधिवक्ता संघ की हड़ताल के चलते इस मामले को अब 18 फरवरी तक के लिए आगे बढ़ा दिया गया है।

यह सुनवाई न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच के समक्ष सूचीबद्ध थी। इस दिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा तैयार की गई 98 दिनों की सर्वे रिपोर्ट को खुली अदालत में प्रस्तुत किया जाना था।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और वर्तमान स्थिति

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि भोजशाला की एएसआई रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और उसकी प्रतियाँ दोनों पक्षों को उपलब्ध कराई जाएं। हालांकि, न्यायालय ने यह भी साफ कर दिया है कि जब तक अंतिम निर्णय नहीं आता, भोजशाला के मूल ढांचे और वर्तमान व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं होगा। 7 अप्रैल 2003 को एएसआई महानिदेशक द्वारा जारी आदेश के अनुसार वर्तमान पूजा-नमाज की व्यवस्था ‘यथास्थिति’ (Status Quo) के तहत बनी रहेगी।

ASI सर्वे के वो तथ्य जो बदल सकते हैं दिशा

पिछली कार्यवाही के दौरान ASI द्वारा किए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षण में कई महत्वपूर्ण प्रमाण सामने आए हैं, जो इस मामले में निर्णायक साबित हो सकते हैं:

  • प्राचीन अवशेष: खुदाई और सर्वे के दौरान कुल 17,000 अवशेष मिले हैं।

  • मूर्तियां: परिसर और आसपास के खेतों से 96 मूर्तियां बरामद हुई हैं।

  • वास्तुकला: सर्वे में 106 स्तंभ पाए गए हैं, जिनमें से 82 स्तंभों पर प्राचीन भित्ति चित्र उकेरे गए हैं।

  • ऐतिहासिक सिक्के: 33 प्राचीन सिक्के मिले हैं, जो 10वीं-11वीं शताब्दी के परमार युग के बताए जा रहे हैं।

  • ढांचागत साक्ष्य: 25 फीट से अधिक की गहराई पर प्राचीन दीवार का ढांचा भी मिला है।

पक्षकारों की तैयारी

याचिकाकर्ता संगठन ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ इन पुरातात्विक साक्ष्यों को आधार बनाकर भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) मंदिर घोषित करने की मांग कर रहा है। मामले की अगली सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और अधिवक्ता विनय जोशी याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रखेंगे।

अब सभी की निगाहें 18 फरवरी पर टिकी हैं, जब अदालत के पटल पर आधिकारिक रूप से यह रिपोर्ट रखी जाएगी।

matribhumisamachar.com

भोजशाला केस टाइमलाइन: मुख्य घटनाक्रम

  • वर्ष 1902-1903: धार रियासत के दौरान भोजशाला के स्मारकों का पहली बार एएसआई (ASI) द्वारा दस्तावेजीकरण किया गया।

  • 7 अप्रैल 2003: एएसआई के तत्कालीन महानिदेशक ने एक आदेश जारी किया, जिसके तहत मंगलवार को हिंदुओं को पूजा और शुक्रवार को मुस्लिमों को नमाज अदा करने की अनुमति देकर ‘यथास्थिति’ (Status Quo) बनाई गई।

  • वर्ष 2022: ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ द्वारा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर कर भोजशाला के पूर्ण वैज्ञानिक सर्वेक्षण की मांग की गई।

  • 11 मार्च 2024: हाईकोर्ट ने भोजशाला परिसर के विस्तृत वैज्ञानिक सर्वे (Scientific Survey) का आदेश दिया।

  • 22 मार्च 2024: एएसआई ने ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) और अन्य आधुनिक तकनीकों के साथ 98 दिनों का सर्वे शुरू किया।

  • जुलाई 2024: एएसआई ने अपनी विस्तृत सर्वे रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की, जिसमें 17,000 अवशेषों और परमार कालीन साक्ष्यों का उल्लेख किया गया।

  • वर्तमान (फरवरी 2026): सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और उस पर अंतिम बहस के लिए मामला सूचीबद्ध है। अधिवक्ता संघ की हड़ताल के कारण अब 18 फरवरी 2026 को अगली महत्वपूर्ण सुनवाई होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *