सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: हिमंत बिस्व सरमा हेट स्पीच मामले में सुनवाई से इनकार, कहा- ‘हाई कोर्ट जाएं’

Saransh Kanaujia
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गुवाहाटी. सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के खिलाफ नफरती भाषण (Hate Speech) और विवादित वीडियो मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए याचिकाकर्ताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि वे सीधे यहाँ आने के बजाय संबंधित हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएं।

“हाई कोर्ट की शक्ति को कमजोर न करें”

जस्टिस सूर्यकांत, जोयमाल्या बाग्ची और विपुल एम. पंचोली की पीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं से पूछा कि वे सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों आए। कोर्ट ने कहा:

“यह चिंताजनक है कि हर मामला यहीं आकर खत्म होता है। हाई कोर्ट एक सक्षम क्षेत्राधिकार वाला न्यायालय है, उसकी शक्ति को कमजोर मत कीजिए। हमें पूरा विश्वास है कि हाई कोर्ट इस पर विचार कर उचित निर्णय ले सकता है।”

जब याचिकाकर्ताओं के वकील ने पुराने उदाहरणों का हवाला दिया, तो चीफ जस्टिस ने दोटूक कहा कि एक क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल करने की जल्दबाजी में वे दूसरे (हाई कोर्ट) को नजरअंदाज नहीं कर सकते। उन्होंने इसे “शॉर्टकट तरीका” करार दिया।

क्या थे आरोप?

भाकपा (CPI) नेत्री एनी राजा और अन्य द्वारा दायर इस याचिका में मुख्यमंत्री सरमा पर गंभीर आरोप लगाए गए थे:

  • मियां मुस्लिम बयान: 27 जनवरी को दिए गए एक भाषण में ‘मियां’ समुदाय पर आपत्तिजनक टिप्पणी।

  • विवादित वीडियो: असम भाजपा के ‘X’ हैंडल पर साझा एक वीडियो, जिसमें कथित तौर पर मुख्यमंत्री को राइफल से निशाना साधते दिखाया गया है, जिसके सामने टोपी और दाढ़ी वाले दो व्यक्ति नजर आ रहे हैं।

  • नफरत फैलाने का आरोप: याचिका में कहा गया कि ये बयान और वीडियो अल्पसंख्यकों के खिलाफ शत्रुता और बहिष्कार को बढ़ावा देते हैं।

वरिष्ठ वकीलों की दलीलें

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी और सीयू सिंह ने दलील दी कि मुख्यमंत्री के बयानों का असर पूरे देश पर पड़ता है और वे “आदतन अपराधी” की तरह व्यवहार कर रहे हैं। हालांकि, कोर्ट ने प्रक्रियात्मक अनुशासन पर जोर देते हुए इन तर्कों को हाई कोर्ट में रखने की सलाह दी।

हाई कोर्ट को ‘त्वरित सुनवाई’ का निर्देश

भले ही सुप्रीम कोर्ट ने सीधे हस्तक्षेप नहीं किया, लेकिन याचिकाकर्ताओं की चिंताओं को देखते हुए पीठ ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया है कि वे इन याचिकाओं पर जल्द से जल्द सुनवाई करें।

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