सावधान! AI तकनीक से बनाया गया रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का फर्जी वीडियो वायरल, जानें क्या है पूरी सच्चाई

नई दिल्ली । शुक्रवार, 15 मई 2026

हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (विशेषकर X और व्हाट्सएप) पर एक वीडियो तेजी से प्रसारित हुआ जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को ईरान और पाकिस्तान के संदर्भ में अत्यंत आक्रामक और विवादास्पद टिप्पणी करते हुए दिखाया गया। वीडियो की गुणवत्ता और आवाज इतनी सटीक थी कि पहली नजर में आम नागरिक इसे सच मान बैठे।

हालांकि, भारत सरकार की आधिकारिक फैक्ट-चेक इकाई, PIB Fact Check ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस वीडियो का विश्लेषण किया और इसे “पूरी तरह से फर्जी” करार दिया।

PIB की जांच में क्या निकलकर आया?

PIB ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि यह वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक का उपयोग करके बनाया गया है। जांच के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • डिजिटल हेरफेर: मूल वीडियो किसी अन्य पुराने संदर्भ का था, जिसमें AI टूल की मदद से रक्षा मंत्री की आवाज (Voice Cloning) और होंठों की हलचल (Lip-syncing) को बदल दिया गया।

  • प्रोपेगेंडा का स्रोत: शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि इस वीडियो को कुछ पाकिस्तानी ‘इन्फ्लुएंसर’ और प्रोपेगेंडा अकाउंट्स द्वारा हवा दी गई ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को नुकसान पहुँचाया जा सके।

  • तथ्यात्मक त्रुटि: रक्षा मंत्री ने हाल के दिनों में ऐसी कोई भी टिप्पणी किसी भी आधिकारिक मंच या प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं की है।

डीपफेक (Deepfake) का बढ़ता खतरा और पहचान के तरीके

आज के दौर में AI न केवल रचनात्मक काम कर रहा है, बल्कि इसका उपयोग ‘मिसइन्फॉर्मेशन’ (Misinformation) फैलाने के लिए भी हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, आप इन तरीकों से फर्जी वीडियो की पहचान कर सकते हैं:

  1. अप्राकृतिक पलकें झपकना: अक्सर AI वीडियो में व्यक्ति की आंखें सामान्य रूप से नहीं झपकतीं।

  2. आवाज की टोन: ध्यान से सुनने पर AI की आवाज में मानवीय भावनाओं की कमी या मशीनी ‘रोबोटिक’ टोन महसूस हो सकती है।

  3. चेहरे के किनारे: यदि वीडियो में चेहरा हिल रहा है और किनारों पर धुंधलापन या ‘ग्लिच’ (Glitch) दिख रहा है, तो वह डीपफेक हो सकता है।

कानूनी कार्रवाई और चेतावनी

भारत सरकार ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नई एडवायजरी जारी की है, जिसके तहत डीपफेक कंटेंट को हटाना अनिवार्य है। IT अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत फर्जी सूचना फैलाना एक दंडनीय अपराध है।

विशेषज्ञों की राय: “किसी भी सनसनीखेज वीडियो को साझा करने से पहले ‘रुको, सोचो और जांचो’ (Stop, Think, Verify) का सिद्धांत अपनाएं। आपकी एक लापरवाही समाज में अशांति पैदा कर सकती है।”

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