PM मोदी ने किया आदिचुंचनगिरी में ‘श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर’ का उद्घाटन: जानें इस भव्य स्मारक की 5 बड़ी खासियतें

बेंगलुरु | बुधवार, 15 अप्रैल 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने कर्नाटक दौरे के दौरान मांड्या जिले के आदिचुंचनगिरी में नवनिर्मित ‘श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर’ का उद्घाटन किया। 80 करोड़ रुपये की लागत से बना यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि कर्नाटक की आध्यात्मिक शक्ति और समाजसेवा की विरासत का नया प्रतीक बनकर उभरा है। इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा भी उनके साथ मौजूद रहे।

कौन हैं गुरु भैरवैक्य और क्या है ‘भैरवैक्य’ का अर्थ?

‘भैरवैक्य’ शब्द का आध्यात्मिक अर्थ होता है—भगवान भैरव (शिव के गण) में विलीन हो जाना

  • यह मंदिर आदिचुंचनगिरी मठ के 71वें पीठाधीश्वर श्री श्री श्री बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी की पावन स्मृति में निर्मित एक भव्य स्मारक है।

  • हिंदू परंपरा के अनुसार, जब कोई महान संत अपना देह त्यागकर परमात्मा में लीन होता है, तो उस अवस्था को ‘भैरवैक्य’ कहा जाता है।

  • पीएम मोदी ने यहाँ पूजा-अर्चना कर महास्वामीजी को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्हें उनके द्वारा किए गए अभूतपूर्व सामाजिक कार्यों के लिए जाना जाता है।

मंदिर की 5 बड़ी खासियतें: द्रविड़ वास्तुकला का बेजोड़ नमूना

  1. द्रविड़ स्थापत्य शैली: मंदिर का निर्माण पारंपरिक द्रविड़ शैली में किया गया है। इसमें जटिल नक्काशीदार स्तंभ और ऊंचे गोपुर हैं जो दक्षिण भारतीय शिल्प कला की भव्यता को दर्शाते हैं।

  2. भारी निर्माण लागत: लगभग 80 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह स्मारक आधुनिक इंजीनियरिंग और प्राचीन कला का संगम है।

  3. सिद्ध पीठ की ऊर्जा: आदिचुंचनगिरी को प्राचीन काल से एक ‘सिद्ध पीठ’ माना जाता है। मान्यता है कि यहाँ की भूमि ऋषियों की तपस्या से जागृत है, जो श्रद्धालुओं को असीम शांति प्रदान करती है।

  4. शैव परंपरा का केंद्र: भगवान कालभैरव को समर्पित यह स्थान ‘नाथ परंपरा’ से भी जुड़ा है, जो इसे उत्तर और दक्षिण भारत की आध्यात्मिक कड़ियों के बीच एक सेतु बनाता है।

  5. सांस्कृतिक विरासत: मंदिर परिसर में 172 नक्काशीदार पत्थर के खंभे और अष्ट भैरव की प्रतिमाएं आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं।

बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी: एक संत जिन्होंने बदली लाखों की तकदीर

1945 में जन्मे बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी ने मठ को केवल धार्मिक केंद्र तक सीमित नहीं रखा। उनके नेतृत्व में:

  • शिक्षा की क्रांति: मठ के तहत सैकड़ों स्कूल और कॉलेज खोले गए, जहाँ ग्रामीण बच्चों को आधुनिक शिक्षा दी जा रही है।

  • पर्यावरण संरक्षण: उन्होंने करोड़ों पेड़ लगाने का अभियान चलाया था।

  • अस्पताल और सेवा: गरीब मरीजों के लिए अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराईं।

राजनीतिक और सांस्कृतिक संदेश

प्रधानमंत्री का यह दौरा सांस्कृतिक के साथ-साथ रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान उन्होंने ‘सौंदर्य लहरी’ और ‘शिव महिम्न स्तोत्रम’ नामक पुस्तकों का विमोचन भी किया। वर्तमान में मठ की कमान 72वें पीठाधीश्वर श्री श्री श्री निर्मलानंदनाथ स्वामीजी के हाथों में है, जो पीएम के साथ इस गौरवमयी पल के साक्षी बने।

आज का संदेश: “यह मंदिर आने वाली पीढ़ियों को सिखाएगा कि अध्यात्म और समाजसेवा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।” — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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