आजमगढ़ फर्जी मदरसा घोटाला: कागजों पर चल रहे थे 219 मदरसे, जानिए कैसे हुआ इस बड़े खेल का पर्दाफाश

आजमगढ़ । रविवार, 14 जून 2026

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले से सरकारी धन के दुरुपयोग और मदरसों में बड़े स्तर पर चल रहे फर्जीवाड़े को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। राज्य सरकार की ‘मदरसा आधुनिकीकरण योजना’ और अल्पसंख्यक छात्रों की छात्रवृत्ति को डकारने वाले फर्जी मदरसा संचालकों के खिलाफ पुलिस और आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है।

हालिया कार्रवाई में बरदह थाना पुलिस ने एक और बड़े आरोपी को दबोच लिया है, जिसके बाद इस पूरे घोटाले की परतें खुलकर सामने आ रही हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर यह पूरा मामला क्या है और किस तरह सिर्फ कागजों पर ही सैकड़ों मदरसे देश के भविष्य और सरकारी खजाने को चूना लगा रहे थे।

कौन है गिरफ्तार आरोपी और क्या था उसका हथकंडा?

इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मदरसा बिस्मिल्लाह मेमोरियल (कोदहरा) के प्रबंधक मोहम्मद मजीद को गिरफ्तार कर लिया है। विधिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद अदालत के आदेश पर उसे जेल भेज दिया गया है।

चौंकाने वाला तथ्य: जांच में सामने आया कि मोहम्मद मजीद ने न केवल जाली और कूटरचित (Forged) दस्तावेज तैयार कर सरकारी राशि का गबन किया, बल्कि उसने चालाकी दिखाते हुए अपने ही घर के सबसे बुजुर्ग सदस्य ‘इस्लाम’ का नाम कागजों में दर्ज कर दिया था। उसका मकसद खुद को बचाकर बुजुर्ग को इस जाल में फंसाना था, लेकिन बारीकी से की गई जांच में उसका यह झूठ पकड़ा गया।

इस मामले में स्थानीय पुलिस और ईओडब्ल्यू की टीम अब तक मोहम्मद मजीद और मोहम्मद अकरम समेत 5 से अधिक मुख्य मदरसा संचालकों और उनके मददगारों को गिरफ्तार कर चुकी है।

219 मदरसे सिर्फ कागजों पर: जमीनी हकीकत में मिलीं दुकानें और गोशालाएं

जब अपराध शाखा (EOW) ने आजमगढ़ जिले के 313 मदरसों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कराया, तो परिणाम हैरान करने वाले थे।

  • कुल 219 मदरसे पूरी तरह अस्तित्वहीन पाए गए। यानी जमीन पर उनका कोई वजूद ही नहीं था।

  • जिन जगहों पर कागजों में मदरसे संचालित होने का दावा किया गया था, वहां असलियत में कहीं कपड़े-किराने की दुकानें, कहीं साधारण स्कूल तो कहीं गोशालाएं (गाय बांधने की जगह) चल रही थीं।

  • मदरसा पोर्टल पर ऑनलाइन डेटा में 100 से अधिक छात्र और कई आधुनिक शिक्षकों की संख्या दर्ज थी, लेकिन मौके पर न तो एक भी छात्र मिला और न ही कोई शिक्षक।

  • हैरानी की बात यह है कि इन कागजी मदरसों ने सरकार से तहतानिया (कक्षा 1 से 5), फोकानिया (कक्षा 6 से 8) और आलिया (कक्षा 9 से 12) स्तर तक की वैध मान्यताएं भी ले रखी थीं।

₹62.84 लाख से अधिक के सरकारी बजट का गबन

ईओडब्ल्यू के निरीक्षक कुंवर ब्रह्म प्रकाश सिंह की तहरीर पर आजमगढ़ के 22 से अधिक थानों में 180 से ज्यादा अस्तित्वहीन मदरसों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुकी है।

इन फर्जी संस्थानों पर केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं जैसे कि—आधुनिक शिक्षकों के मानदेय (Honorarium) और अल्पसंख्यक छात्रों की छात्रवृत्ति (Scholarship) के मदों में 62.84 लाख रुपये से अधिक की राशि अवैध रूप से हड़पने का आरोप है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, घोटाले की यह रकम और अधिक बढ़ सकती है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत

इस फर्जीवाड़े को छुपाने और कार्रवाई से बचने के लिए कुछ प्रबंधकों द्वारा एसआईटी (SIT) और ईओडब्ल्यू की रिपोर्ट को अदालत में चुनौती दी गई थी। हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए याचिका को खारिज कर दिया, जिसके बाद योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत पुलिस को इन जालसाजों पर सीधी कार्रवाई करने का पूरा रास्ता मिल गया।

स्थानीय प्रशासन और ईओडब्ल्यू के अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई अभी सिर्फ शुरुआत है। आने वाले दिनों में कई और रसूखदार नाम, फर्जी शिक्षक और विभागीय मिलीभगत करने वाले लोग भी सलाखों के पीछे नजर आ सकते हैं।

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