धामी कैबिनेट का बड़ा फैसला: उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड होगा खत्म, अब USAME प्राधिकरण करेगा मदरसों का संचालन

देहरादून | गुरुवार, 14 मई 2026  

उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाया है। कैबिनेट की होलिया बैठक में “उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों संबंधी मान्यता नियमावली–2026” को मंजूरी दे दी गई है। इस नई व्यवस्था के तहत राज्य में वर्षों से चले आ रहे मदरसा बोर्ड को 1 जुलाई 2026 से आधिकारिक रूप से भंग कर दिया जाएगा।

क्या है नया नियम और क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

राज्य में संचालित 452 पंजीकृत मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक संस्थानों को अब एक नए नियामक ढांचे के तहत काम करना होगा। सरकार ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (USAME) के गठन का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री धामी का स्पष्ट मत है कि मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों को भी मुख्यधारा की शिक्षा मिलनी चाहिए ताकि वे देश की प्रगति में समान रूप से योगदान दे सकें।

नई नियमावली की प्रमुख विशेषताएं:

  • दो-चरणीय पंजीकरण: अब मदरसों को पहले उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से संबद्धता (Affiliation) लेनी होगी, उसके बाद USAME प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त करनी होगी।

  • अनिवार्य पंजीकरण शुल्क: अब तक कई मदरसे बिना किसी शुल्क या निगरानी के चल रहे थे, लेकिन अब पंजीकरण और नवीनीकरण के लिए निर्धारित शुल्क जमा करना अनिवार्य होगा।

  • पारदर्शिता और डाटा: संस्थानों को अपने शिक्षकों का विवरण, छात्रों की संख्या, और बुनियादी सुविधाओं की पूरी जानकारी डिजिटल पोर्टल पर देनी होगी।

  • मान्यता की अवधि: प्रत्येक मान्यता केवल तीन शैक्षणिक वर्षों के लिए वैध होगी, जिसके बाद समीक्षा के आधार पर इसका नवीनीकरण किया जाएगा।

अवैध संचालन पर होगी सख्त कार्रवाई

सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि 1 जुलाई 2026 के बाद बिना पंजीकरण के चल रहे किसी भी मदरसे या अल्पसंख्यक संस्थान का संचालन अवैध माना जाएगा। मानकों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों को बंद करने या उनकी मान्यता तुरंत रद्द करने का प्रावधान भी इस नियमावली में शामिल है।

चुनौतियां और विरोध के स्वर

जहां सरकार इसे ‘शिक्षा के लोकतंत्रीकरण’ और ‘सुधार’ के रूप में पेश कर रही है, वहीं कुछ मुस्लिम संगठनों और विपक्षी दलों ने इसे अल्पसंख्यक संस्थानों पर अतिरिक्त बोझ बताया है। विशेष रूप से छोटे मदरसों के लिए बुनियादी ढांचे के कड़े मानकों को पूरा करना और पंजीकरण शुल्क वहन करना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

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