ब्रिगेड का रण: PM मोदी का ममता सरकार पर ‘त्रिशूल’ प्रहार, बंगाल में फूंका 2026 चुनाव का बिगुल

Saransh Kanaujia
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का बिगुल आधिकारिक तौर पर फूंका जा चुका है। शनिवार को कोलकाता का ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड उस समय सियासी रणक्षेत्र में तब्दील हो गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा की ‘परिवर्तन संकल्प रैली’ के जरिए ममता बनर्जी सरकार पर अपना अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। हालांकि, इस मेगा रैली से पहले कोलकाता की सड़कों पर जमकर हिंसा, पथराव और आगजनी हुई, जिसने राज्य की कानून-व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ब्रिगेड रैली से पहले हिंसा: गिरीश पार्क बना जंग का मैदान

प्रधानमंत्री के पहुंचने से कुछ घंटे पहले ही उत्तर और मध्य कोलकाता के कई इलाकों में तनाव फैल गया। सबसे भीषण झड़प गिरीश पार्क इलाके में हुई, जहां भाजपा कार्यकर्ताओं की बसों पर उपद्रवियों ने पथराव किया।

  • घायल और तोड़फोड़: इस हिंसा में बोबाजार थाने के ओसी (OC) समेत कई पुलिसकर्मी और दर्जनों भाजपा कार्यकर्ता घायल हुए हैं। भाजपा का आरोप है कि उनकी बसों को निशाना बनाकर तोड़ा गया, जबकि टीएमसी ने दावा किया कि भाजपा समर्थकों ने कैबिनेट मंत्री शशि पांजा के घर पर पत्थरबाजी की।

  • कटआउट विवाद: ब्रिगेड मैदान के आसपास पीएम मोदी के विशाल कटआउट्स को खंडित किया गया, जिसके बाद इलाके में भारी पुलिस बल और RAF की तैनाती करनी पड़ी।

पीएम मोदी का ‘त्रिशूल’ प्रहार: रोटी, माटी और बेटी पर खतरा

प्रधानमंत्री मोदी ने दक्षिणेश्वर मंदिर की थीम पर बने भव्य मंच से अपने भाषण की शुरुआत की। उन्होंने ममता सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए तीन बड़े आरोप लगाए:

  1. डेमोग्राफी और घुसपैठ: पीएम ने कहा कि बंगाल की “रोटी, माटी और बेटी” आज खतरे में है क्योंकि वोट बैंक के लिए घुसपैठियों को खुली छूट दी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीमावर्ती जिलों की डेमोग्राफी जानबूझकर बदली जा रही है।

  2. वोटर लिस्ट में धांधली (SIR Row): हालिया ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि टीएमसी सरकार ने लाखों असली मतदाताओं के नाम कटवाने की कोशिश की है ताकि चुनाव में धांधली की जा सके।

  3. हिंदुओं को धमकी: प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री का नाम लिए बिना उनके हालिया बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोग एक समुदाय को दूसरे के खिलाफ भड़का रहे हैं, जिसे बंगाल की जनता बर्दाश्त नहीं करेगी।

18,680 करोड़ की सौगात और ‘पलटानो दरकार’ का नारा

सियासी हमलों के बीच प्रधानमंत्री ने बंगाल के बुनियादी ढांचे के लिए खजाना भी खोल दिया। उन्होंने 18,680 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।

  • इकोनॉमिक कॉरिडोर: 231 किमी लंबा खड़गपुर-मोरग्राम इकोनॉमिक कॉरिडोर क्षेत्र के व्यापार की तस्वीर बदल देगा।

  • अमृत भारत स्टेशन: राज्य के 6 रेलवे स्टेशनों को वर्ल्ड क्लास सुविधाओं से लैस करने के प्रोजेक्ट का लोकार्पण हुआ।

  • नया नारा: रैली में भाजपा ने अपना नया चुनावी नारा बुलंद किया— “पलटानो दरकार, चाई भाजपा सरकार” (बदलाव की जरूरत है, भाजपा सरकार चाहिए)।

सियासी समीकरण: क्यों खास है यह रैली?

यह रैली भाजपा की 5,000 किलोमीटर लंबी ‘परिवर्तन यात्रा’ का समापन थी, जो राज्य की 237 विधानसभा सीटों से होकर गुजरी है।

  • वोटर लिस्ट का मुद्दा: चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, हाल ही में बंगाल की वोटर लिस्ट से करीब 63.66 लाख नाम हटाए गए हैं, जिसे लेकर भाजपा और टीएमसी के बीच कानूनी और राजनीतिक जंग जारी है।

  • इलेक्शन मोड: सूत्रों की मानें तो चुनाव आयोग अगले सप्ताह ही बंगाल चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है। भाजपा ने पहले ही 3 चरणों में चुनाव कराने की मांग की है।

टीएमसी का पलटवार: “यह भाजपा का आंतरिक कलह है”

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने हिंसा के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। टीएमसी प्रवक्ता ने कहा कि जो हिंसा हुई वह भाजपा के भीतर टिकट वितरण को लेकर चल रही गुटबाजी का नतीजा है। साथ ही, ममता बनर्जी ने पीएम की रैली के जवाब में सोमवार को रसोई गैस (LPG) की बढ़ती कीमतों के खिलाफ कोलकाता की सड़कों पर उतरने का ऐलान किया है।

कोलकाता की इस रैली ने साफ कर दिया है कि 2026 का चुनाव केवल विकास नहीं, बल्कि ध्रुवीकरण, पहचान और सुरक्षा के मुद्दों पर लड़ा जाएगा। बंगाल की राजनीति अब उस मोड़ पर है जहां हर दिन एक नया सियासी मोड़ देखने को मिल सकता है।

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