‘मंदिर या मस्जिद, तेज आवाज में कहीं भी नहीं बजेंगे लाउडस्पीकर’, CM शुभेंदु का सख्त आदेश

Saransh Kanaujia
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कोलकाता । बुधवार,  13 मई 2026 

पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में राज्य की पहली भाजपा सरकार ने सत्ता संभालते ही प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। शपथ ग्रहण के कुछ ही घंटों के भीतर मुख्यमंत्री ने नबन्ना (राज्य सचिवालय) में पुलिस और शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की और एक दर्जन से अधिक कड़े निर्देश जारी किए।

इन फैसलों में कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने से लेकर युवाओं के रोजगार और महिलाओं की सुरक्षा तक को प्राथमिकता दी गई है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उनकी सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम करेगी।

प्रमुख सरकारी आदेश और उनके प्रभाव

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा जारी किए गए निर्देशों की सूची लंबी है, लेकिन उनमें से कुछ सबसे महत्वपूर्ण ये हैं:

  • धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर: सरकार ने आदेश दिया है कि किसी भी धार्मिक स्थल के बाहर लाउडस्पीकर की आवाज़ परिसर की सीमा से आगे नहीं जानी चाहिए। पुलिस को इसे “सार्वभौमिक” रूप से बिना किसी भेदभाव के लागू करने को कहा गया है।

  • रोजगार में बड़ी राहत: राज्य सरकार की नौकरियों के लिए आवेदन की अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष से बढ़ाकर 45 वर्ष कर दी गई है। यह उन लाखों युवाओं के लिए बड़ी खबर है जो उम्र सीमा के कारण अवसर खो रहे थे।

  • महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा: 1 जून से राज्य की सभी निजी बसों में महिलाओं के लिए यात्रा पूरी तरह मुफ्त होगी।

  • हिंसा और अपराध पर नकेल: चुनाव के बाद हुई हिंसा के 1300 से अधिक पुराने मामलों को फिर से खोलने और उनकी नए सिरे से जांच करने का आदेश दिया गया है। साथ ही, दुष्कर्म और छेड़छाड़ के लंबित मामलों पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

  • अवैध गतिविधियां: कोयला, रेत और पत्थर के अवैध खनन के साथ-साथ पशु तस्करी को पूरी तरह रोकने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं।

प्रशासनिक सुधार और चुनौतियाँ

मुख्यमंत्री ने पुलिस को निर्देश दिया है कि गिरफ्तारियां केवल ठोस एफआईआर (विशेषकर हिंसा और जबरन वसूली) के आधार पर ही की जाएं। साथ ही, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को दी गई सरकारी सुरक्षा वापस लेने का भी निर्णय लिया गया है। हालाँकि, लाउडस्पीकर और सड़कों पर प्रार्थना सभाओं पर रोक जैसे निर्णयों का कुछ समुदायों द्वारा विरोध भी शुरू हो गया है, जिसे संतुलित करना नई सरकार के लिए एक चुनौती होगी।

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