तमिलनाडु राजनीति: वैचारिक दबाव में झुके सीएम विजय, 24 घंटे में ज्योतिषी रिकी राधन पंडित की छुट्टी

चेन्नई | बुधवार, 13 मई 2026 

तमिलनाडु के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अपनी सरकार के पहले बड़े विवाद को शांत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने अपने निजी ज्योतिषी और आध्यात्मिक गुरु रिकी राधन पंडित को मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में ‘विशेष कार्याधिकारी’ (OSD-Political) नियुक्त करने के फैसले को मात्र 24 घंटे के भीतर वापस ले लिया है। यह निर्णय आज विधानसभा में बहुमत परीक्षण (Floor Test) जीतने के तुरंत बाद लिया गया।

विवाद की मुख्य वजह: तर्कवाद बनाम व्यक्तिगत विश्वास

मुख्यमंत्री विजय ने मंगलवार, 12 मई को रिकी राधन पंडित की नियुक्ति का आदेश जारी किया था। इसके बाद से ही तमिलनाडु की राजनीति में भूचाल आ गया।

  • गठबंधन का दबाव: विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के प्रमुख गठबंधन सहयोगियों—CPI(M), CPI, और कांग्रेस—ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। वामपंथी दलों का कहना था कि सार्वजनिक धन पर किसी ज्योतिषी की नियुक्ति “अंधविश्वास” को बढ़ावा देना है और यह तमिलनाडु की द्रविड़ तर्कवादी (Rationalist) संस्कृति के खिलाफ है।

  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर सवाल: CPI(M) के राज्य सचिव पी. शनमुगम ने कहा कि सरकार का कर्तव्य वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना है, न कि ज्योतिषीय परामर्श को आधिकारिक दर्जा देना।

कौन हैं रिकी राधन पंडित?

रिकी राधन पंडित पिछले 40 वर्षों से ज्योतिष और आध्यात्मिक परामर्श के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्हें विजय का बेहद करीबी माना जाता है।

  1. विजय की जीत की भविष्यवाणी: उन्होंने चुनाव से काफी पहले दावा किया था कि विजय की कुंडली “सुनामी” जैसी जीत लेकर आएगी।

  2. शपथ ग्रहण का समय: राज्यपाल द्वारा सरकार बनाने की मंजूरी मिलने के बाद, रिकी राधन पंडित ने ही 10 मई की सुबह 10:00 बजे का समय शपथ के लिए शुभ बताया था।

  3. जयललिता कनेक्शन: बताया जाता है कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता को भी सलाह दी थी, जिसमें उनके नाम की स्पेलिंग बदलने (दो ‘a’ जोड़ने) का सुझाव शामिल था।

सुधारात्मक कदम: नियुक्ति निरस्त

आज जारी सरकारी आदेश (Office Proceedings No. 675) के अनुसार, रिकी राधन पंडित की नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीएम विजय अपनी सरकार की “धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील” छवि को बनाए रखने के लिए अपने सहयोगियों को नाराज नहीं करना चाहते थे।

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