अफ़गानिस्तान-पाकिस्तान जंग की आहट: तालिबान का पाकिस्तान के कोहाट किले पर बड़ा ड्रोन हमला, काबुल-कंधार पर बमबारी

Saransh Kanaujia
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काबुल. अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराना सीमा विवाद अब एक पूर्ण सैन्य संघर्ष का रूप लेता दिखाई दे रहा है। पिछले 48 घंटों में दोनों देशों के बीच हुई भारी गोलाबारी, हवाई हमलों और पहली बार हुए ड्रोन हमलों ने पूरी दुनिया का ध्यान इस क्षेत्र की ओर खींच लिया है। डूरंड लाइन पर जारी यह तनाव अब केवल सीमा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दोनों देशों के मुख्य शहरों तक पहुँच गया है।

तालिबान का बड़ा दावा: कोहाट सैन्य किले पर ड्रोन हमला

तालिबान सरकार के रक्षा मंत्रालय ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि उनकी वायु सेना (Air Force) ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कोहाट (Kohat) क्षेत्र में घुसकर रणनीतिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।

  • निशाना: तालिबान के अनुसार, उनके उन्नत ड्रोनों ने पाकिस्तान के एक प्रमुख सैन्य किले और कमांड सेंटर को पूरी तरह तबाह कर दिया है।

  • रणनीति: रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह दावा सच है, तो यह तालिबान की युद्ध क्षमता में आए बड़े बदलाव को दर्शाता है, क्योंकि अब वे पारंपरिक युद्ध के बजाय तकनीकी हमलों (Drone Warfare) का सहारा ले रहे हैं।

पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई: काबुल से कंधार तक बमबारी

पाकिस्तान ने भी इस हमले का कड़ा जवाब दिया है। पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान के भीतर घुसकर कई प्रांतों में भीषण बमबारी की।

  1. निशाना बने क्षेत्र: काबुल, कंधार, पक्तिया और पक्तिका प्रांत।

  2. TTP का मुद्दा: पाकिस्तान का कहना है कि यह हमला तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के सुरक्षित ठिकानों को नष्ट करने के लिए किया गया था, जो पाकिस्तान में हालिया आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार हैं।

  3. नागरिक हताहत: तालिबान प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इन हमलों में रिहाइशी इलाकों को निशाना बनाया गया, जिसमें महिलाओं और बच्चों सहित कई बेगुनाह नागरिकों की जान गई है।

आर्थिक और बुनियादी ढांचे को चोट

इस सैन्य कार्रवाई में कंधार हवाई अड्डे के पास स्थित निजी एयरलाइन Kam Air के ईंधन डिपो को भी भारी नुकसान पहुँचा है। जानकारों का कहना है कि नागरिक विमानन सेवाओं को निशाना बनाना युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है और इससे अफगानिस्तान की हवाई कनेक्टिविटी पूरी तरह ठप हो सकती है।

क्यों सुलग रही है ‘डूरंड लाइन’?

दोनों देशों के बीच इस नफरत की जड़ डूरंड लाइन (Durand Line) है। 2,640 किलोमीटर लंबी यह सीमा रेखा ब्रिटिश काल में खींची गई थी, जिसे अफगानिस्तान कभी स्वीकार नहीं करता।

  • विवाद का कारण: अफगानिस्तान का मानना है कि यह रेखा पश्तून समुदाय को दो हिस्सों में बांटती है।

  • ताजा उबाल: हाल के हफ्तों में पाकिस्तान द्वारा सीमा पर बाड़ लगाने (Fencing) के प्रयासों को तालिबान ने बलपूर्वक रोकने की कोशिश की है, जिससे आए दिन सीमा पर झड़पें हो रही हैं।

भारत और दुनिया की चिंताएँ

क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव कम नहीं हुआ, तो इसके परिणाम भयावह हो सकते हैं:

  • शरणार्थी संकट: युद्ध की स्थिति में लाखों अफगान नागरिक पड़ोसी देशों की ओर पलायन कर सकते हैं।

  • आतंकवाद का विस्तार: अस्थिरता का फायदा उठाकर ISIS-K जैसे संगठन क्षेत्र में अपनी जड़ें मजबूत कर सकते हैं।

  • भारत का रुख: भारत इस स्थिति पर करीब से नज़र बनाए हुए है, क्योंकि अफगानिस्तान की अस्थिरता का सीधा असर कश्मीर और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।

निष्कर्ष: अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ता यह ‘प्रॉक्सि वॉर’ अब सीधी सैन्य टक्कर में बदल चुका है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है ताकि एक और मानवीय त्रासदी को रोका जा सके।

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