संभल पीएम श्री विद्यालय विवाद: मजहबी शिक्षा और ब्रेनवॉश के आरोप में 3 शिक्षक सस्पेंड, FIR दर्ज

Saransh Kanaujia
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लखनऊ। सोमवार, 11 मई 2026

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित एक पीएम श्री विद्यालय में शिक्षा के नाम पर धार्मिक एजेंडा चलाने का गंभीर मामला सामने आया है। जालब सराय स्थित इस विद्यालय में छात्रों को कथित तौर पर मजहबी शिक्षा देने, हिजाब पहनने के लिए प्रेरित करने और उनका ब्रेनवॉश करने के आरोपों के बाद जिला प्रशासन ने “हंटर” चलाया है। जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने प्राथमिक जांच में दोषी पाए जाने पर प्रधानाध्यापक सहित तीन शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

वीडियो वायरल होने के बाद खुला राज

मामले की शुरुआत सोशल मीडिया पर वायरल हुए कुछ वीडियो और तस्वीरों से हुई। इन वीडियो में स्कूली छात्र-छात्राओं को कथित तौर पर धार्मिक प्रार्थनाएं करते और मजहबी टोपी व हिजाब पहने दिखाया गया था। इसके साथ ही शिक्षकों पर आरोप लगा कि वे कक्षा में अन्य धर्मों के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणियां करते थे और छात्रों के बीच भेदभावपूर्ण व्यवहार को बढ़ावा दे रहे थे।

प्रशासनिक जांच और पुष्टि

खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) ने विद्यालय का औचक निरीक्षण किया और छात्रों से गोपनीय तरीके से पूछताछ की। जांच में सामने आया कि:

  1. विद्यालय में शैक्षिक गतिविधियों की जगह मजहबी गतिविधियों को प्राथमिकता दी जा रही थी।

  2. छात्रों के मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली बातें सिखाई जा रही थीं।

  3. प्रधानाध्यापक मोहम्मद अंजार अहमद और सहायक अध्यापक मोहम्मद गुल एजाज इस पूरी प्रक्रिया के मुख्य सूत्रधार थे।

  4. प्रभारी प्रधानाध्यापक बालेश कुमार ने अपने दायित्वों में लापरवाही बरती और इन गतिविधियों को रोकने का प्रयास नहीं किया।

संवैधानिक और कानूनी उल्लंघन

प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि यह कृत्य भारतीय संविधान के अनुच्छेद 28 का खुला उल्लंघन है, जो सरकारी शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा पर रोक लगाता है। साथ ही, यह निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार (RTE) अधिनियम-2009 और उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली-1956 की धाराओं के तहत दंडनीय है।

कड़ी कानूनी कार्रवाई

जिलाधिकारी के निर्देश पर थाना नखासा में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(2) और 61(2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। मामले की गहराई से जांच के लिए मुख्य विकास अधिकारी (CDO) की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है।

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